December 29, 2025

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ONCD : गैंगस्टर-आतंकियों पर भारत का सबसे बड़ा डिजिटल प्रहार

गैंगस्टरों और खालिस्तानी नेटवर्कों को निशाना बनाना




नई दिल्ली | जगजीत सिंह | यह भारत सरकार द्वारा संगठित अपराध, गैंगस्टरों और आतंकवादियों के खिलाफ शुरू किया गया सबसे बड़ा डिजिटल अभियान है। यह पहल नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के नेतृत्व में विकसित की गई है। इसका उद्देश्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाले आपराधिक नेटवर्कों की पहचान करना और उन्हें एक ही प्लेटफॉर्म पर खत्म करना है। OCND एक राष्ट्रव्यापी केंद्रीकृत डेटाबेस है जो अब पूरी तरह से चालू है, जिससे अपराधियों की पहचान और निगरानी पहले से कहीं ज़्यादा आसान हो गई है।

पूरे देश का डेटा एक जगह

OCND को NIA के नेतृत्व में विकसित किया गया है ताकि संगठित अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में कोई ढिलाई न हो। देश भर के सभी राज्यों की पुलिस बल और केंद्रीय जांच एजेंसियां ​​इस डेटाबेस से जुड़ी हुई हैं। पहले अलग-अलग राज्यों में बिखरी हुई जानकारी अब एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जिससे आपराधिक नेटवर्कों, उनके लिंक और गतिविधियों को समझना आसान हो गया है। यह सिस्टम जांच एजेंसियों के बीच समन्वय को भी मजबूत करता है।

गैंगस्टरों और खालिस्तानी नेटवर्कों को निशाना बनाना

OCND को विशेष रूप से संगठित गिरोहों, गैंगस्टरों और खालिस्तानी नेटवर्कों को निशाना बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसे अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन माना जा रहा है, जो सीधे राष्ट्र-विरोधी तत्वों को निशाना बना रहा है। खालिस्तानी अलगाववादी आतंकवादियों और उनके नेताओं की पूरी प्रोफाइल इस डेटाबेस में रिकॉर्ड की जा रही है। इससे उनके नेटवर्कों को जड़ से खत्म करने में मदद मिलेगी। सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला मानती है।

एक क्लिक में पूरी जानकारी

इस केंद्रीकृत डेटाबेस की सबसे बड़ी ताकत "वन-क्लिक एक्सेस" है। अब, पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां ​​एक क्लिक में किसी भी अपराधी के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर सकती हैं। पहले, अलग-अलग राज्यों से जानकारी इकट्ठा करने में समय लगता था; अब यह मिनटों में किया जा सकता है। इससे जांच में तेजी आएगी और अपराधियों को भागने से रोका जा सकेगा। रियल-टाइम डेटा शेयरिंग से ऑपरेशन और भी सटीक होंगे।

विदेश से काम करने वाले अपराधियों पर शिकंजा

OCND सिर्फ देश के अंदर काम करने वाले अपराधियों तक सीमित नहीं है। विदेश से भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले गैंगस्टर और खालिस्तानी आतंकवादी भी इसके दायरे में हैं। यह डेटाबेस उनके यात्रा मार्गों, फंडिंग और संपर्कों को ट्रैक करेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और उनके खिलाफ कार्रवाई मजबूत होगी। सरकार का मानना ​​है कि यह कदम राष्ट्र-विरोधी ताकतों के लिए एक बड़ा झटका है।

बिश्नोई गैंग से लेकर पन्नू तक सबका पूरा रिकॉर्ड

लॉरेंस बिश्नोई गैंग, गोल्डी बराड़ गैंग, बब्बर खालसा इंटरनेशनल और सिख्स फॉर जस्टिस जैसे संगठनों के नाम OCND (ऑर्गेनाइज्ड क्राइम नेटवर्क डेटाबेस) में दर्ज किए जा रहे हैं। विदेश से काम करने वाले देश-विरोधी तत्वों, जैसे गुरपतवंत सिंह पन्नू, की पूरी गतिविधियाँ इस डेटाबेस में शामिल की जाएंगी। उन सभी की पूरी "ब्लैक बुक" इस डेटाबेस में सुरक्षित रूप से स्टोर की जाएगी। इससे उनके नेटवर्क और फंडिंग चैनलों का पता लगाने में मदद मिलेगी। जाँच एजेंसियों के पास अब पक्के डिजिटल सबूत होंगे।

अपराधियों की पूरी डिजिटल कुंडली

OCND में संगठित अपराधियों की बेहद विस्तृत जानकारी दर्ज होगी | इसमें अपराधियों की तस्वीरें, फिंगरप्रिंट और फेसियल रिकग्निशन डेटा शामिल है | इसके अलावा उनके इस्तेमाल किए गए ट्रैवल रूट, फर्जी पहचान पत्र और बैंक अकाउंट की ट्रांजेक्शन डिटेल भी दर्ज होगी | फॉरेंसिक और डिजिटल मैपिंग से उनकी गतिविधियों को ट्रैक किया जाएगा | यानी अपराधी की पूरी डिजिटल कुंडली एक जगह मौजूद रहेगी | 

राज्यों की पुलिस के लिए गेमचेंजर

देशभर की राज्य पुलिस और जांच एजेंसियां लगातार इस डेटाबेस में नई जानकारी अपडेट करती रहेंगी | जैसे-जैसे डेटा बढ़ेगा, OCND और ज्यादा मजबूत होता जाएगा | अलग-अलग राज्यों की पुलिस इस साझा डेटा का इस्तेमाल अपने मामलों में कर सकेगी | इससे अपराधियों के लिए राज्य बदलकर बचना मुश्किल हो जाएगा | कुल मिलाकर OCND भारत में संगठित अपराध के खिलाफ एक गेमचेंजर साबित होने वाला है | 




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सोनम कौर भाटिया

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