सरकारी विद्यालय का गेट गिरने से एक बालक की मौत हो गई। सूत्रों के अनुसार, लंच के बाद कुछ बच्चे विद्यालय का गेट पकड़ कर झूल रहे थे तभी पिलर सहित लोहे का गेट अचानक गिर गया।उस समय विद्यालय में कोई भी शिक्षक नहीं था । स्कूल में सिर्फ रसोइयां ही मौजूद थी
सोनभद्र । न्यूज डेस्क । उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद में सरकारी विद्यालय का गेट गिरने से एक बालक की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक लंच के बाद कुछ बच्चे विद्यालय का गेट पकड़ कर झूल रहे थे तभी पिलर सहित लोहे का गेट अचानक भरभरा कर गिर गया। हादसे के बाद विद्यालय में हड़कंप मच गया। उस समय विद्यालय में कोई भी शिक्षक नहीं था । स्कूल में सिर्फ रसोइयां ही मौजूद थी, आनन-फानन में किसी तरह परिजनों ने बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया जहां उसकी हालात गंभीर देखते हुए वाराणसी के लिए रेफर कर दिया गया।
हाथ से हिलाने पर हिलती है स्कूल की बिल्डिंग
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय की चारदीवारी जर्जर है जो हाथ से हिलाने से भी हिल रही है। कायाकल्प योजना के तहत विद्यालय का कोई भी कार्य नहीं कराया गया है, ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर कायाकल्प योजना के तहत विद्यालय का सुंदरीकरण क्यों नहीं कराया गया। बता दें कि कक्षा एक में पढ़ने वाला 7 वर्षीय बालक श्लोक पटेल पुत्र सुरेंद्र पटेल पकडेवा प्राथमिक विद्यालय में नित्य की भांति स्कूल पढ़ने गया था, इसी दरमियान दोपहर एक बजे कुछ बच्चों के संग वह स्कूल का गेट पकड़कर झूल रहा था कि इतने में अचानक विद्यालय का लोहे का गेट पिलर सहित उनके ऊपर धड़ाम से गिर गया और बालक नीचे दब गए।
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शोर-शराबा सुनकर लोग स्कूल की तरफ दौड़े और लोहे की गेट से दबे बालक को बाहर निकाल एम्बुलेंस बुलाने के लिए संपर्क करने लगे। तीन बार लगातार एम्बुलेंस बुलाने के लिए हेल्पलाइन पर सम्पर्क किया गया, लेकिन एम्बुलेंस नहीं आया । अंत में परिजनों संग ग्रामीणों ने निजी वाहन से शाम दुद्धी सीएचसी लाए जहां से बालक की स्थिति गंभीर देखते हुए उसे यहां से रेफर कर दिया था कि वाराणसी ट्रामा सेंटर पहुंचते ही चिकित्सकों ने बालक को मृत घोषित कर दिया।
बच्चों की जान आफत में
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय की चारदीवारी इतनी कमजोर है कि वह हाथ से हिलाने पर ही हिल रही है जो नन्हे-मुन्ने बच्चों की जान की आफत है, लेकिन विद्यालय प्रशासन और विभाग को इसकी तनिक भी परवाह नहीं है ।
कायाकल्प योजना के तहत भी विद्यालय का काम नहीं कराया जा सका है ना तो रंग रोगन और ना ही मरम्मत का कार्य कराया गया है।