जत्थेबंदियों द्वारा शिक्षा अधिकारी को लगाई लताड़-जिला कलैक्टर को दिया ज्ञापन
जिला शिक्षा अधिकारी के फर्जीवाड़े के पेश किए सबूत
श्री गंगा नगर । न्यूज डेस्क । पिछले लंबे समय से एक सोच समझी साजिश के तहत राजस्थान में पंजाबी भाषा को खत्म करने के मंसूबे तैयार किये जा रहे है।सिख विरोधी ताकतें जहां आर्थिक,समाजिक व सभ्याचारक तौर पर सिख कौम की विचारधारा को खत्म करने के लिए हर तरह का प्रयास कर रही है वहीं स्कूली स्तर पर भी पंजाबी भाषा को खत्म करने के साज़िशें रची जा रही है।
ताज़ा घटनाक्रम मुख्य ब्लाक शिक्षा अधिकारी द्वारा छह स्कूलों में पंजाबी विषय पढ़ाने की अनुशंसा करने का है। जिसमे राबाउप्रावि एससी/ एसटी अरायन,राउप्रावि 16 ओ,राउप्रावि 29 एच, राउप्रावि वार्ड नम्बर 10 करनपुर, राउप्रावि 20 एच बी,राउमावि 56 एफ प्रमुख है।
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा पंजाबी विरोध मुख्य रख अनुशंसा होने के बावजूद सिर्फ एक स्कूल राउप्रावि 56 एफ में ही पंजाबी अध्यापक लगाने के लिए निदेशक बीकानेर गौरव अग्रवाल को अनुशंसा भेज दी।गौरव अग्रवाल जिला शिक्षा अधिकारी से भी दो कदम आगे निकला जिस एक स्कूल में पंजाबी अध्यापक की अनुशंसा की गई थी वहां निदेशक ने अपना पंजाबी विरोध रवैया रख संस्कृत अध्यापक लगा दिया।
अधिकारियों की इस पंजाबी विरोधी सोच के विरोध में सिख जत्थेबंदियों ने जहां जिला शिक्षा अधिकारी को जवाब तलब किया।वही जिला कलैक्टर को ज्ञापन देकर पंजाबी भाषा से बेइंसाफी करने वाले फिरकापरस्त अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कारवाई करने को कहा।सिख जत्थेबंदियों ने शिक्षा अधिकारियों को चेताया कि फिरकापरस्त सोच त्याग कर ईमानदारी से कार्य करें नहीं तो उन्हें कौमी आक्रोश का सामना करना पड़ेगा जो उनके लिए घातक होगा।
जत्थेबंदियों में तेजिंदर पाल सिंह टिम्मा, बाबा गगनदीप सिंह,मास्टर तरलोचन सिंह,कुलविंदर सिंह राजू,गुरप्रीत सिंह सिधू,बाबा भूपिंदर सिंह कमल,वकील सिंह,जसवीर सिंह पिंकू,हरनाम सिंह,रुपिंदर सिंह,कुलवंत सिंह,हरपिंदर सिंह,गुरमीत सिंह व रूपेंद्र सिंह शामिल थे ।