भोपाल | न्यूज़ डेस्क | आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित शालाओ में भी स्कूल शिक्षा विभाग की भांति “एक परिसर एक शाला’’ व्यवस्था लागू की जा रही है। इस संबंध में आदिम जाति कल्याण विभाग मध्यप्रदेश शासन, भोपाल द्वारा दिशा निर्देश जारी कर दिये गये है। एक परिसर एक शाला व्यवस्था में एकीकृत रूप से शालाओ का संचालन होगा । जिसके अंतर्गत 150 मीटर की परिधी में आने वाली समस्त प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल एवं हॉयर सेकेण्डरी शालाओं को मिलाकर इन सभी संस्थाओ का प्रशासन एक प्राचार्य/प्रधान अध्यापक के नियंत्रण में रहेगा।
सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग सुधांशु वर्मा ने बताया कि “एक परिसर एक शाला’’ व्यवस्था के लागू होने से शालाओ के एकीकरण में कोई भी शाला बंद नही होगी, बल्कि ऐसे परिसर को परिसर की विशिष्ट शाला जिसमें उच्चतम स्तर की कक्षाएं संचालित हो रही है, उनके नाम से जाना जायेगा । यह व्यवस्था पूरी तरह से प्रशासनिक है, जिसमें एक परिसर एक शाला के अंतर्गत किसी परिसर में आने वाली समस्त शालाओ का नियंत्रण एक प्रशासनिक प्रधान अध्यापक या प्राचार्य के पास होने से वहां पदस्थ शिक्षको का उपयोग उनकी योग्यता के अनुसार परिसर में किया जा सकेगा। जिससे शिक्षको की कमी की समस्या पर नियंत्रण पाना आसान होगा और एक प्रशासनिक नियंत्रण होने से शालाओ का संचालन अनुशासित तरीके से किये जाने में सहायता मिलेगी ।
सहायक आयुक्त श्री वर्मा ने बताया कि बालाघाट जिले के आदिवासी विकासखंडो में भी “एक परिसर एक शाला’’ व्यवस्था लागू होने के पश्चात बैहर, बिरसा एवं परसवाड़ा विकासखंड में लगभग 203 परिसर निर्मित होगे । जहां आसपास की शालाएं यथावत प्रशासनिक रूप से एकीकृत होकर संचालित होगी, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता एवं अधोसंरचना का विकास हो सकेगा ।