रायपुर | मिनल केडेकर | छत्तीसगढ़ सिख समाज ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा लागू किए गए तख्त सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब गुरुद्वारा एक्ट-2026 पर व्यापक पुनर्विचार की मांग करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र प्रेषित किया है। छत्तीसगढ़ सिख समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिंघोत्रा द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि नांदेड़ स्थित पवित्र तख्त सचखंड हजूर अबचलनगर साहिब संपूर्ण विश्व के करोड़ों सिखों की सर्वोच्च आस्था का केंद्र है। ऐसे में इसके प्रबंधन से जुड़े किसी भी नए कानून को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श एवं सर्वसम्मति आवश्यक है।
पत्र में आग्रह किया गया है कि तख्त सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब गुरुद्वारा एक्ट-2026 को तत्काल प्रभाव से लागू करने पर रोक लगाई जाए तथा पूर्व में लागू 1956 के अधिनियम को यथावत बनाए रखा जाए। साथ ही, किसी भी संशोधन से पहले सभी अकाल तख्तों के जत्थेदारों, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रतिनिधियों, देश-विदेश के सिख संगठनों, धार्मिक संस्थाओं एवं समाज के विद्वानों के साथ व्यापक संवाद कर सर्वमान्य सहमति बनाई जाए।
छत्तीसगढ़ सिख समाज ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि वर्तमान अधिनियम को लेकर सिख समाज के विभिन्न वर्गों में गहरी चिंता और असंतोष है। धार्मिक आस्था एवं परंपराओं से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय सभी पक्षों की सहभागिता और सहमति से ही लिया जाना चाहिए। समाज ने महाराष्ट्र सरकार से आग्रह किया है कि जब तक व्यापक सहमति नहीं बन जाती, तब तक नए अधिनियम को स्थगित रखा जाए तथा सिख समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता, परंपराओं एवं संवैधानिक अधिकारों का पूर्ण सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिंघोत्रा, समाज के अन्य प्रमुख सदस्यों नरेंद्र सिंह हरगोत्रा, स्वर्ण सिंह चावला, कुलवंत सिंह खालसा, मनजीत सिंह भाटिया, स्वर्णपाल सिंह चावला, जागीर सिंह बावा, देवेंद्र सिंह चावला, रणजीत सिंह खनूजा, अमृत सिंह सूर, जसप्रीत सिंह चावला, इंदर पाल सिंह गांधी, गुरमीत सिंह छाबड़ा, मानवेंद्र सिंह डडियाला, अत्तर सिंह, मनदीप सिंह सलूजा, छत्तीसगढ़ सिख समाज के बिलासपुर जिला अध्यक्ष गुरमीत सिंह अरोरा, रायगढ़ जिला अध्यक्ष प्रितपाल सिंह टुटेजा, बेमेतरा जिला अध्यक्ष हरदीप सिंह राजा छाबड़ा, चरणपाल सिंह बाजवा, चरणजीत सिंह पनेसर ने विश्वास व्यक्त किया कि महाराष्ट्र सरकार सिख समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ पुनर्विचार करेगी और ऐसा निर्णय लेगी जिससे सामाजिक एवं धार्मिक सौहार्द बना रहे।