नई दिल्ली | न्यूज़ डेस्क | आजकल लोगों के पास हर किसी चीज में बहुत से ऑप्शंस मौजूद होते हैं | कई लोग इसे आजादी मानते हैं तो बहुत से लोग इस ऑप्शंस की भीड़ में खुद को काफी थका हुआ महसूस करते हैं | आजकल Gen Z में तेजी से Decision Fatigue भी बड़ रहा है |
आज की Gen Z के पास हर रास्ते में ऑप्शंस की कोई कमी नहीं है | क्या पहनना है क्या खाना है कौन सा करियर चुनना है कौन सा ऐप इस्तेमाल करना है और किससे बात करनी है हर कदम पर सैकड़ों ऑप्शंस सामने होते हैं | बाहर से ये आजादी और लग्जरी लगती है लेकिन अंदर ही अंदर ये ऑप्शन दिमाग को थका रहे हैं | इसी मानसिक थकान को Decision Fatigue कहा जाता है जहां बार बार फैसले लेने की मजबूरी इंसान को कंफ्यूज, थका हुआ और चिड़चिड़ा बना देती है |
क्या है Decision Fatigue
डिसीजन फटीग का सीधा मतलब है लगातार फैसले लेने से दिमाग का थक जाना | Gen Z डिजिटल दुनिया में पली बढ़ी पीढ़ी है जहां हर चीज के कई विकल्प मौजूद हैं | यही वजह है कि छोटे छोटे फैसले भी भारी लगने लगते हैं | इसका असर मूड, नींद, काम की क्वालिटी, और मेंटल हेल्थ पर साफ नजर आता है | हालांकि डिसीजन फटीग कोई बड़ी बीमारी नहीं है लेकिन अगर समय रहते इसे समझा न जाए तो ये रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना सकती है |
ऑप्शंस की तलाश
आज के यंगस्टर्स सुबह उठते ही फैसले लेने लगते हैं अलार्म स्नूज करें या नहीं, कौन सा आउटफिट पहनें, कौन सा रील देखें, कौन सा कैफे ट्राय करें और कौन सा करियर ऑप्शन बेहतर रहेगा | सोशल मीडिया और इंटरनेट ने हर चीज में ऑप्शंस की संख्या कई गुना बढ़ा दी है. हर चीज की तुलना हर जगह मौजूद है ऐसे में दिमाग हर समय सोचता रहता है कि कहीं गलत फैसला तो नहीं ले लिया यही ओवरथिंकिंग धीरे धीरे थकान में बदलने लग जाती है |
क्या है लक्षण
डिसीजन फटीग के कुछ लक्षण बेहद ही आम होते हैं, जैसे छोटी छोटी बातों पर चिढ़ जाना, फैसले टालते रहना, हर ऑप्शन को देखकर भी संतुष्ट न होना, दिन के आखिर में बहुत ज्यादा थकान महसूस होना और कभी कभी बिल्कुल भी फैसला न ले पाना | कई बार लोग खाने का मेन्यू देख कर भी फैसला नहीं कर पाते हैं कि उन्हें क्या खाना है | Gen Z में इसके बढ़ने की एक बड़ी वजह FOMO जिसका मतलब होता है फियर ऑफ मिसिंग आउट | हर ऑप्शन को बेस्ट मानने की कोशिश दिमाग पर दबाव बनाती है इसके अलावा मल्टी टास्किंग और हर वक्त ऑनलाइन रहना भी मेंटल हेल्थ के लिए हानिकारक साबित हो सकता है |
कैसे बचे
इससे बचने के लिए सबसे जरूरी है अपनी डेली लाइफ में ऑप्शन को सीमित करना. हर चीज में परफेक्ट ढूंढने की जरूरत नहीं है ये समझना बेहद ही जरूरी होता है. इसके अलावा छोटे फैसलों को सिंपल रखें जैसे कपड़ों या खाने का बेसिक रूटीन बना लें | खुद पर भरोसा करना सीखें इसके अलावा नींद पूरी लेना और दिमाग को आराम देना भी Decision Fatigue से बचाने में काफी ज्यादा मददगार साबित हो सकता है |