नागपुर । डॉ विवेक बांबल। मोबाइल, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की बढ़ती लत ने न केवल अभिभावकों बल्कि शिक्षकों की भी चिंता बढ़ा दी है । बच्चों का पढ़ाई से ध्यान भटककर स्क्रीन की ओर बढ़ना और इसके कारण होने वाली शारीरिक व मानसिक समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार अब सख्त कदम उठाने जा रही है । इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने विशेषज्ञों की एक 'टास्क फोर्स' नियुक्त की है । इसमें मनोवैज्ञानिक, शिक्षाविद् और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है । यह टीम डिजिटल लत के प्रभावों का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें सौंपेगी, जिसके आधार पर स्कूलों और अभिभावकों के लिए मार्गदर्शक दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे । सरकार स्कूलों में हर शनिवार को 'स्क्रीन-फ्री' रखने पर विचार कर रही है । इस पहल के तहतःबिना किसी डिजिटल उपकरण के शैक्षिक गतिविधियां संचालित की जाएगी । मैदानी खेल, रीडिंग (वाचन), कला और रचनात्मक कार्यशालाओं पर जोर दिया जाएगा।
16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कड़े नियम
सोशल मीडिया और गेमिंग के दुष्परिणामों को रोकने के लिए सरकार कुछ कड़े प्रस्तावों पर विचार कर रही हैं । इंटरनेट और सोशल मीडिया अकाउंट खोलने के लिए उम्र के सत्यापन हेतु ई-केवाईसी करना अनिवार्य होगा।
घर में स्क्रीन टाइम की स्पष्ट समय सीमा तय करें
अभिभावक स्वयं मोबाइल का कम उपयोग कर बच्चों के सामने उदाहरण पेश करें । मैदानी खेल, पढ़ाई और हॉबीज को बढ़ावा दें । रात को सोने से कम से कम एक घंटा पहले 'नो-स्क्रीन टाइम' का पालन करें और करें औरबच्चों से डिजिटलउपयोग के खुलकर बात करें ।
ऐसे रोकें डिजिटल की लगी लत
16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर माता-पिता की अनुमति आवश्यक हो सकती है । टास्क फोर्स की रिपोर्ट के बाद ऑनलाइन गेमिंग को लेकर भी अंतिम निर्णय लिया जाएगा ।
स्क्रीन-फ्री शनिवार बच्चों को प्रत्यक्ष शिक्षा, संवाद और खेल का महत्व समझाएगा । आज के युग में डिजिटल साधनों का आवश्यक है, लेकिन उनका संतुलित उपयोग सिखाना ही समय की मांग है ।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिवस' पर जागरूकता
शिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग से बच्चों को 'डिजिटल डिटॉक्स'कराया जाएगा ताकि उनमें प्रत्यक्ष संवाद की आदत विकसित हो सके ।