नागपुर । एड अब्दुल अमानी कुरेशी । विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य सरकार ने 'लाडला भाऊ' योजना अर्थात मुख्यमंत्री युवा कार्य प्रशिक्षणार्थी योजना के तहत 10 लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था। लेकिन महायुति सरकार चुनाव खत्म होते ही इनका मानधन भी भूल गई। चार महीने से इन्हें मानधन नहीं मिला है, जिसने अब इन्हें फिर से बेरोजगारों की कतार में खड़ा कर दिया है। सरकार से नाराज लाडले भाऊ सड़कों पर उतर आए। ठाणे में कलेक्टर कार्यालय के सामने उन्होंने जोरदार आंदोलन किया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी मांगों को लेकर सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है।
सरकार का काउंटडाउन शुरू। 11 महीने प्रशिक्षणार्थोंयो के रूप में काम करने के बाद भी हजारों युवाओं को आज तक स्थाई नौकरी नहीं मिली है। मुख्यमंत्री युवा कार्य प्रशिक्षणार्थी योजना के तहत 10 लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा महायुति सरकार ने किया था। लेकिन प्रशिक्षण
के दौरान न तो मानधन दिया जा रहा है और जिन लोगों ने प्रशिक्षण पूरा किया, वे अब घर बैठे हैं। ऐसे में नाराज हजारों बेरोजगार युवाओं ने उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के विरोध में ठाणे जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर जोरदार आंदोलन किया और धरना दिया। आंदोलनकारी युवाओं ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने एक सप्ताह के भीतर ठोस निर्णय नहीं लिया तो वे आंदोलन करेंगे।
एकनाथ मामा ने ही दिया धोखा
आंदोलनकारी मुख्यमंत्री युवा कार्य प्रशिक्षणार्थी सहायक संघटन ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले सरकार ने युवाओं को लुभाने के लिए योजना की घोषणा की, लेकिन अब उन्हीं युवाओं को सड़क पर छोड़ दिया गया। हमारे एकनाथ मामा ने अपने ही लोगों को धोखा दिया है। ऐसा तीखा आरोप संगठन ने लगाया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री शिंदे ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और कहा कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से चर्चा करेंगे और 8 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाएगा।
एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री युवा प्रशिक्षण योजना के माध्यम से राज्य के विद्यार्थियों को रोजगार दिलाने का आश्वासन दिया था।
लेकिन 11 महीने प्रशिक्षणार्थी के रूप में काम करने के बाद भी हजारों युवाओं को आज तक स्थाई नौकरी नहीं मिली है। शिंदे ने युवाओं को उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार 6 हजार से 10 हजार रुपए प्रतिमाह मानधन और स्थाई नियुक्ति का वादा किया था। हालांकि, आंदोलनों के बावजूद 1 लाख 75 हजार प्रशिक्षणार्थी अब भी बेरोजगार हैं। आंदोलनकारियों ने मांग की कि उन्हें स्थाई रोजगार दिया जाए, मानधन में दोगुनी वृद्धि की जाए और आने वाले अधिवेशन में रोजगार गारंटी कानून लाया जाए, जो स्थाई नौकरी की गारंटी दे सके।