नई दिल्ली। जसविंदर सिंह। सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े दो मामलों में CBI ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है । मुंबई और पटना की अदालतों में पेश की गई इस रिपोर्ट में कहा गया कि जांच के दौरान कोई ‘फाउल प्ले’ या साजिश के सबूत नहीं मिले । सुशांत सिर्फ 34 साल की उम्र में 14 जून 2020 को मुंबई के अपने फ्लैट में मृत पाए गए थे । मुंबई पुलिस की शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या माना गया था । पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह फांसी के कारण दम घुटना बताई गई थी । राजपूत की मौत ने पूरे देश में उबाल ला दिया था । सोशल मीडिया से लेकर न्यूज चैनलों तक, हर जगह सुशांत केस के चर्चे थे । परिवार ने सुशांत की कथित गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती पर आरोप लगाए । इसके बाद बिहार पुलिस ने केस दर्ज किया और मामला CBI को सौंप दिया गया था ।
CBI की क्लोजर रिपोर्ट का क्या मतलब
क्लोजर रिपोर्ट तब दायर की जाती है जब जांच एजेंसी को कोई ठोस सबूत नहीं मिलते । लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि मामला पूरी तरह बंद हो गया है । अदालत के पास आखिरी फैसला लेने का अधिकार होता है। अगर अदालत को जांच अधूरी लगती है, तो वह अतिरिक्त जांच के आदेश दे सकती है । शिकायतकर्ता के पास प्रोटेस्ट पिटीशन दायर करने का विकल्प होता है, जिससे जांच दोबारा शुरू हो सकती है । अगर अदालत क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर लेती है, तो केस खत्म माना जाएगा ।
परिवार के आरोप और CBI की जांच
सुशांत के पिता केके सिंह ने पटना में दर्ज करवाई गई FIR में रिया चक्रवर्ती और कुछ अन्य लोगों पर आत्महत्या के लिए उकसाने, मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक गड़बड़ी का आरोप लगाया था। इसके जवाब में रिया ने मुंबई में एक काउंटर-शिकायत दर्ज करवाई, जिसमें कहा गया कि सुशांत की बहनों ने उनके लिए फर्जी मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन बनवाया था । CBI ने दोनों मामलों की जांच की और अब क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है । रिपोर्ट के अनुसार, कोई आपराधिक साजिश या हत्या के संकेत नहीं मिले ।
CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर अदालत का रुख देखने वाला रहेगा । अगर कोर्ट इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लेती है, तो केस आधिकारिक रूप से बंद हो जाएगा । लेकिन अगर सुशांत के परिवार ने प्रोटेस्ट पिटीशन दायर की, तो अदालत आगे की जांच के आदेश दे सकती है ।