April 03, 2026

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रामानंद सागार की 'रामायण' से भी तगड़ी है फिल्म की रेटिंग : क्यों हुई थी बैन




मुंबई | न्यूज़ डेस्क | भारतीय सिनेमा और वैश्विक एनीमेशन के इतिहास में रामायण एक ऐसा विषय रहा है जिसने हर पीढ़ी के रचनाकारों को प्रेरित किया है। हाल ही में रणबीर कपूर अभिनीत और नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित फिल्म 'रामायण' का टीजर 2 अप्रैल को मुंबई में जारी किया गया, जिसने डिजिटल जगत में तहलका मचा दिया है, लेकिन इस आधुनिक प्रस्तुति के बीच इतिहास के पन्नों में एक ऐसी जापानी फिल्म दर्ज है जिसने तीन दशक पहले ही भगवान राम की गाथा को एनीमेशन के माध्यम से अमर कर दिया था। इस फिल्म को IMDb पर रामानंद सागर की रामायण से भी रेटिंग मिली है, जो कि 9.1 है।

एक जापानी फिल्मकार का भारतीय सपना

इस अद्भुत एनिमेटेड फिल्म की नींव जापानी फिल्मकार यूगो साका ने रखी थी। भारत यात्रा के दौरान रामायण की महानता से प्रभावित होकर साका ने इसके लगभग 10 अलग-अलग एडिशन का गहन अध्ययन किया। उनके मन में यह साफ विचार था कि भगवान राम जैसे दिव्य व्यक्तित्व को कोई भी साधारण मनुष्य पूरी तरह पर्दे पर नहीं उतार सकता, इसलिए उन्होंने एनीमेशन को माध्यम चुना। हालांकि 90 के दशक के भारत में एनीमेशन को केवल बच्चों के मनोरंजन तक सीमित माना जाता था, जिसके कारण साका को शुरुआत में काफी विरोध और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

विवादों का साया और भारत में देरी

1993 में बनकर तैयार हुई इस फिल्म का सफर आसान नहीं था। तत्कालीन भारत के संवेदनशील राजनीतिक और सांप्रदायिक माहौल खास कर 1992 की घटनाओं के बाद देवी-देवताओं के एनिमेटेड चित्रण को लेकर चिंताएं जताई गईं। लोगों को डर था कि विदेशी प्रोडक्शन द्वारा तैयार यह फिल्म धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती है। इसी अस्थिरता के कारण फिल्म को उस वक्त भारत में रिलीज नहीं किया जा सका। हालांकि इसका प्रीमियर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया में हुआ और दूरदर्शन पर भी इसे सीमित बार दिखाया गया।

दिग्गज कलाकारों का संगम और तकनीकी टीम

इस फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता इसकी हिंदी डबिंग थी, जिसमें अरुण गोविल ने प्रभु राम को अपनी आवाज दी थी। वहीं राहुल बोस और साइरस ब्रोचा जैसे कलाकारों ने भी अन्य किरदारों के लिए डबिंग की। फिल्म के निर्माण में 'बाहुबली' और 'RRR' फेम लेखक वी. विजयेंद्र प्रसाद का रचनात्मक योगदान रहा, जबकि संगीत दिग्गज वनराज भाटिया ने तैयार किया था। इसका निर्देशन कोइची सासाकी और भारतीय एनीमेशन के पितामह कहे जाने वाले राम मोहन ने संयुक्त रूप से किया था।

32 साल का इंतजार और 4K में शानदार वापसी

लंबे समय तक गुमनामी में रहने के बाद आखिरकार वर्ष 2025 में इस कालजयी फिल्म को वह सम्मान मिला जिसकी यह हकदार थी। करीब 32 साल के लंबे इंतजार के बाद 24 जनवरी 2025 को गीक पिक्चर्स इंडिया, एए फिल्म्स और एक्सेल एंटरटेनमेंट के सहयोग से इसे भारत के सिनेमाघरों में रिलीज किया गया। आधुनिक दर्शकों के लिए इसे 4K फॉर्मेट में अपग्रेड किया गया और हिंदी, अंग्रेजी, तमिल व तेलुगु, इन चार भाषाओं में बड़े पर्दे पर उतारा गया। आज यह न केवल एनीमेशन की दुनिया में शानदार फिल्म मानी जाती है, बल्कि यह भारत और जापान के बीच कल्चरल पुल बन चुकी है।




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