नई दिल्ली | न्यूज़ डेस्क | कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने देश की सियासत में खलबली मचा दी है। 5 ही दिन में यह देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं चर्चा है कि पार्टी अब चुनाव भी लड़ेगी। इसके लिए चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन कराएगी और चुनाव चिह्न हासिल करेगी। आइए जानते हैं कि इसके लिए चुनाव आयोग के नियम क्या हैं |
5 दिन में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के इंस्टाग्राम अकाउंट पर फॉलोअर्स 1.87 करोड़ हो गए हैं। इतने फॉलोअर्स के साथ पार्टी ने देश की 2 बड़ी पार्टियों भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को भी पीछे छोड़ दिया है। भारतीय जनता पार्टी के इंस्टाग्राम पर करीब 85 लाख फॉलोअर्स हैं और कांग्रेस पार्टी के 1.3 करोड़ फॉलोअर्स हैं। लेकिन CJP का X अकाउंट भारत में बंद कर दिया गया है।
अभिजीत दिपके ने देश के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के एक बयान के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) बनाई है और भारतीय सियासत में एंट्री में की है। वे अमेरिका के बोस्टान शहर से इस पार्टी का कामकाज देख रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस को 2 सांसद इस पार्टी को लॉइन कर चुके हैं। यह पार्टी अपने मजेदार और सरकार-विरोधी अंदाज की वजह से सोशल मीडिया पर वायरल हुई है।
CJI के बयान के विरोध में बनी पार्टी
अभिजीत दिपके ने अपनी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के लिए कॉकरोच या मोबाइल इन दोनों में से एक चुनाव चिह्न मांगा है। लेकिन इन पर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि चुनाव आयोग का नियम है कि पशु प्रतीक को चुनाव चिह्न नहीं बनाया जा सकता तो कॉकरोच सिंबल नहीं मिलेगा। मोबाइल सिंबल चुनाव आयोग के मुफ्त प्रतीकों की सूची में नहीं है, इसलिए दोनों चिह्न नहीं मिल सकते।
चुनाव चिह्न के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
चर्चा है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) साल 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ेगी। इसके लिए पार्टी को देशभर में अपना विस्तार करना होगा। विस्तार करने के लिए पार्टी को चुनाव आयोग में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A के तहत जिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन होने के बाद ही पार्टी को चुनाव चिह्न मिलेगा। इसके बाद ही देश में पार्टी की पहचान कायम होगी और वह अपने साथ नए लोगों को जोड़कर ऑफिशियली काम कर पाएगी।
चुनाव चिह्न के लिए चुनाव आयोग के नियम
भारत में चुनाव चिह्न भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के द्वारा दिए जाते हैं। चुनाव चिह्न 2 प्रकार के होते हैं। एक आरक्षित प्रतीक, जो देश की बड़ी और मान्यता-प्राप्त पार्टियों को मिलते हैं, जैसे BJP का कमल, कांग्रेस का हाथ और AAP का झाड़ू। दूसरे मुफ्त प्रतीक होते हैं, जो नई और छोटी पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों को दिए जाते हैं, जिनकी एक लंबी सूची है, जिसमें 100 से ज्यादा चिह्न हैं। इसमें लैंडलाइन फोन और मोबाइल चार्जर के सिंबल जरूर हैं, पर मोबाइल फोन नहीं है।
जानवर के चुनाव चिह्न पर ECI का नियम
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) रजिस्ट्रेशन के बाद ही अपनी पसंद के 3 नए चिह्न का प्रस्ताव चुनाव आयोग को दे सकती है। लेकिन 1968 के चुनाव चिह्न आदेश में प्रावधान है कि नया चिह्न किसी पक्षी या जानवर जैसा नहीं होना चाहिए। कॉकरोच एक जानवर है, इसलिए CJP को यह चिह्न नहीं मिल सकता। वैसे ECI यह तय करेगी कि वो कॉकरोच को जानवर की कैटेगरी में रखती है या नहीं। अगर यह जानवरों की कैटेगरी में शामिल हुआ तो शायद पार्टी को नाम भी बदलना पड़े।