रीवा। समशेर सिंह गहरवार। डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री शुक्ल के कुशल आश्वासन के चलते रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में डॉक्टरों की टीम द्वारा लीड लेंस पेसमेकर का इंप्लांट किया गया। ऐसा कारनामा वरिष्ठ हृदय विशेषण डॉक्टर एस के त्रिपाठी के टीम द्वारा किया गया। जानकारों की माने तो डॉक्टर त्रिपाठी ने प्रदेश के उच्च स्तरीय अस्पतालों को मात देते लीडलेस दूसरा इंप्लांट कर प्रदेश में अपना स्थान बनाया है। जिसकी वजह से अब विंध्य वासियों में उम्मीद जगनी शुरू हो चुकी है कि बड़े शहरों की अपेक्षा अब रीवा में ही हार्ट रोगियों का इलाज हो सकेगा । 
मिली जानकारी अनुसार डॉक्टर एस के त्रिपाठी ने सतना जिले की 62 वर्षीय महिला मरीज को, जो पूर्ण हृदय अवरोध होने की स्थिति में जटिल प्रक्रिया कर राहत दिलाई। बताया गया है कि मरीज की उपचारार्थ (हृदय की धड़कन 30) से पीड़ित थीं। अत्याधुनिक लीडलैस पेसमेकर का सफलतापूर्वक इंप्लांट कर नई जिंदगी प्रदान की गई। यह प्रक्रिया विश्वभर में हृदय रोगियों के लिए सबसे जटिल मानी जाती है । इसे सफलतापूर्वक संपन्न करना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, रीवा के लिए गौरव का विषय है। हालांकि यह रीवा वासियों के लिए ही नहीं विंध्यवासियों के लिए भी अच्छी खबर है। सोचनीय यह है कि क्या हर हार्ट पेशेंट को मुख्यमंत्री योजना का लाभ मिल सकेगा? ऐसे लोगों की संख्या तो सैकड़ो में नहीं हजारों में होगी जिनके अनुदान के कागज आज भी ऑफिस में भटकते होंगे। उनके लिए भी खोज कर मदद पहुंचाई जाए तो शायद प्रदेश स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में अग्रणी बन सकता है ? वही तभी हमारे गृह जिले के डिप्टी सीएम के चिकित्सा क्षेत्र के मामले में अच्छी सार्थक पहल का सपना साकार हो सकता है।