हिंगनघाट । एड अब्दुल अमानी कुरेशी। चिकित्सक समाज का वह मजबूत स्तंभ हैं, जो अपने सुख-दुःख और निजी जीवन की परवाह किए बिना चौबीसों घंटे मानव सेवा में समर्पित रहते हैं। रोगी के जीवन की रक्षा करना ही उनका सर्वोच्च धर्म होता है। चाहे कोरोना महामारी जैसा कठिन दौर रहा हो या सामान्य परिस्थितियाँ, चिकित्सकों ने हमेशा अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा, साहस और संवेदनशीलता के साथ किया है। उनका योगदान समाज के लिए सदैव प्रेरणादायी और अविस्मरणीय रहेगा।
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर ज्ञानशक्ति सेवा फाउंडेशन की ओर से सभी चिकित्सकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके समर्पण, सेवा भावना और मानवता के प्रति योगदान को नमन किया गया।
फाउंडेशन ने कहा कि हिंगनघाट के दिवंगत डॉ. बाबूलालजी खेतल ऐसे चिकित्सक थे, जिन्होंने चिकित्सा को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का माध्यम बनाया। उनकी सरलता, करुणा और मरीजों के प्रति आत्मीय व्यवहार के कारण आज भी क्षेत्र के लोग उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करते हैं।
उनके पदचिह्नों पर चलते हुए उनके सुपुत्र डॉ. मोहन खेतल भी मरीजों के प्रति उसी संवेदनशीलता, विनम्रता और सेवा भावना के साथ अपना दायित्व निभा रहे हैं। उनके व्यवहार में अपने पिता के संस्कार और मानवीय दृष्टिकोण की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। यही कारण है कि वे भी लोगों के बीच एक लोकप्रिय और विश्वासपात्र चिकित्सक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।
ज्ञानशक्ति सेवा फाउंडेशन ने इस अवसर पर सभी चिकित्सकों को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण में डॉक्टरों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उनके समर्पण और सेवाओं का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।