January 05, 2025

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अमृत से कम नहीं है कोदौ : डा मिश्रा

बीमारियों में रामबाण




रीवा |समशेर सिंह गहवार | डॉ बी . एल. मिश्रा चिकित्सा विशेषज्ञ ने कहा है कि कोदौ  की खेती सदियों से भारत व कई अन्य देशों में होती रही है | इस फसल की खासियत है कि यह कम पानी की उपलब्धता या सूखा( अकाल) के दौरान भी बिना रासायनिक खाद के उपयोग के पैदावार होता है। कोदौ का उपयोग चावल के विकल्प के रूप में होता है।  इसकी प्रकृति ठंडक होती है। यह मिलेट्स या विभिन्न मोटा आनाजो में से एक है। पुराने समय से  कोदौ को गरीबों का अनाज माना जाता था।  किंतु वर्तमान में इसके विभिन्न गुणो के कारण ही इस अनाज की कीमत बढ़ी है।   पूंजीपति भी शौक से चावल के विकल्प व औषधि रूप में खाते हैं। वर्तमान में बहुतायत तादात में कृषक  कोदौ की खेती में काफी रूचि ले रहे हैं।

महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से भरपूर

 मोटे अनाज कोदौ में स्वास्थ्य की दृष्टि से विभिन्न अवयव कार्बोहाइड्रेट (66%), प्रोटीन(8%),  चर्बी (1.5%),  एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर, कैल्शियम, विभिन्न विटामिन और जिंक के साथ कई विरले तत्व (मैग्नीशियम, फास्फोरस, सोडियम, पोटेशियम) उपस्थित रहते हैं। 

 बीमारियों में रामबाण

 मिलेट्स कोदौ भोजन के प्रमुख अवयव के अतिरिक्त विभिन्न बीमारियों की रोकथाम में लाभदायक है।  यह बीमारियां  डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, मोटापा, कोलेस्ट्रोल का बढ़ना, विभिन्न बीमारियों से रोकथाम (किडनी, लीवर,हृदय रोग, विभिन्न कैंसर, गठिया वात, पित्त_  किडनी में पथरी बनना), चमड़ी व बाल में सौंदर्य, अस्थियों की मजबूती आदि।

  खाने के विभिन्न रूप

 प्रति व्यक्ति अधिकतम 100 ग्राम तक चावल के विकल्प के रूप में पकाकर,खीर,उपमा, पुलाव ,हलवा व पापड़ के रूप में अन्य अनाज- चना, गेहूं,मूंग, व दूध तथा अपनी पसंद के मसालों के साथ उपयोग में लाएं।  अनाज को मिल में दराई करने के पश्चात कूटकर उपचारित करें व साफ पानी में धोकर उपयोग करें। कोदौ पूर्ण रूपेण सुरक्षित है व खाने पर मृत्यु की संभावना शून्य है। किंतु कभी-कभी स्वच्छता के भाव में उल्टी,दस्त, मतली हो सकती है ।




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