रीवा । समशेर सिंह गहरवार। जिले का सुपर स्पेशलिटी अस्पताल खास तौर पर हार्ट रोगियों के लिए वरदान साबित हो रहा है। अब तक सुपर स्पेशलिटी के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट ने करीबन 1000 मरीजों की एंजियोप्लास्टी कर मरीजों को जीवन दान दिया। वही 300 मरीजों का पेसमेकर व हजारों दिल के रोगियों लाट-सीआरटी प्रोसीजर कर जान बचाई। जिससे रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को मध्य प्रदेश में पहला स्थान मिल चुका है। इस तरह का कारनामा अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एस के त्रिपाठी एवं उनकी टीम द्वारा कर दिखाया गया है।
वह अपने नित्य नये प्रयोग के चलते हार्ट रोगियों के लिए धरती के भगवान साबित हो रहे हैं। लेकिन उन्हें इस बात का कोई गुमान नहीं बल्कि साधारण इंसान की तरह मरीजों की सेवा में हमेशा प्रयास रत व चिंतित रहते हैं कि संबंधित मरीजों की जान कैसे बचाई जाए। इसी कड़ी में एक और कदम आगे बढ़ते हुए हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर त्रिपाठी द्वारा सीआरटीडी मशीन को दिल में प्लांट कर हृदय की बीमारी से पीड़ित एक मरीज की जान बचाई। पता चला है कि उक्त मरीज को सांस फूलना और चक्कर आने की बीमारी थी।
परीक्षण के बाद डॉक्टर टीम को समझ में आया कि हार्ट की पंपिंग कम होने से मरीज ऐसी बीमारी से ग्रसित है। त्रिपाठी ने देरी न करते हुए तुरंत टीम को अलर्ट करते हुए कैथ लैब में ले जाकर सीआरटीडी कड़ी मशक्कत के बाद हृदय में मशीन को इंप्लांट किया। जैसे ही मशीन दिल में इंप्लांट हुई पीड़ित मरीज की स्थिति भी सुधरने लगी अब उन्हें सांस लेने और चक्कर आने जैसी शिकायत अब सामने नहीं आ रही। उल्लेखनीय है कि इस तरह की मशीन को क्रिटिकल प्रोसीजर के तहत पहली बार हार्ट में इंप्लांट किया गया है ताकि हार्ट की पंपिंग बढ़ सके। जानकारी अनुसार जब संबंधित मरीज को अस्पताल लाया गया था उनकी हार्ट पंपिंग 20% थी अब वह बढ़कर नॉर्मल हो चुकी है। डॉ त्रिपाठी के प्रयासों से ऐसा चमत्कार पहली बार रीवा में किया गया, जिससे अस्पताल के खाते में महानगरों की तर्ज पर एक और नई उपलब्धि जुड़ गई। ऐसा सफल क्रिटिकल प्रोसीजर डॉक्टर एसके त्रिपाठी के मार्गदर्शन में उनकी टीम ने सफलतापूर्वक कर दिखाया जो किसी चमत्कार से कम नहीं लग रहा है। उल्लेखनीय है कि संबंधित मरीज का पहले दिल की एनजीओ प्लास्टी हुई थी कुछ सालों बाद सांस लेने में दिक्कत व चक्कर आने की शिकायत शुरू हो गई। संबंधित मरीज रीवा मेडिकल कॉलेज छात्र के पिता हैं।
जब मेडिकल छात्र को पता लगा कि इस तरह की तकलीफ का सामना हमारे पिताजी कर रहे हैं। उनके पुत्र द्वारा तुरंत ही अस्पताल के ओपीडी में डॉक्टर त्रिपाठी को दिखाया । उक्त प्रोसीजर के लिए डॉक्टर त्रिपाठी ने सहयोग के लिए मेडिकल कॉलेज डीन डॉक्टर एसके अग्रवाल एवं अधीक्षक डॉक्टर अक्षय श्रीवास्तव को धन्यवाद देते हुए कहा की अगर अधिकारियों का सहयोग न मिलता तो प्रोसीजर करना कठिन था।