October 28, 2024

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आसान है लकवा से बचना : डाक्टर बीएल मिश्रा

विश्व स्ट्रोक दिवस पर विशेष




 रीवा। समशेर सिंह गहरवार। विश्व के 120 से अधिक देशों में प्रतिवर्ष 29 अक्टूबर को "विश्व स्ट्रोक दिवस" मनाया जाता है। स्ट्रोक (लकवा, ब्रेन अटैक) प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है जो दुनिया भर में हृदय रोग के बाद मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण व लोगों को दिव्यांग बनाने वाली सबसे बड़ी बीमारी है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य है_ स्ट्रोक की रोकथाम और उपचार के बारे में जागरूकता बढ़ाने, बीमारी से बचे लोगों का समर्थन करने, पुनर्वास व इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या के प्रभाव के बारे में आम जन को शिक्षित किया जाना है। विश्व स्ट्रोक संगठन (डब्ल्यूएसओ) द्वारा इस बीमारी को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल माना गया है क्योंकि यह स्थिति एक इमरजेंसी होती है ।

वर्ष 2024 की विश्व स्ट्रोक दिवस की थीम है_" ग्रेटर देन स्ट्रोक सक्रिय चुनौती" है। स्ट्रोक के ज्यादातर मामलों में यदि हम यह कहें कि यह मानव निर्मित समस्या है तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए क्योंकि ज्यादातर प्रकरण में इसे हम रोक सकते हैं।

पूरे विश्व में 1.5 करोड़ लोग स्ट्रोक से पीड़ित 

 पूरी दुनिया में अनुमानित 1.5 करोड़ लोग स्ट्रोक से पीड़ित होते हैं जिनमें 50 लाख की मौत व अन्य 50 लाख स्थाई दिव्यांग से पीड़ित हो जाते हैं । समस्या की भयावहता यह है कि हर छठवें व्यक्ति को स्ट्रोक से प्रभावित होने की संभावना होती है। यह समस्या भारत सहित विकासशील देशों में विकसित देशों की तुलना में अधिक गंभीर है। विकसित देशों में स्ट्रोक 42 % कम हुआ है जबकि विकासशील देशों में इस समस्या में 100% की वृद्धि हुई है ।

भारत में प्रतिवर्ष 10 लाख लोग स्ट्रोक से पीड़ित होते हैं। हर एक मिनट में तीन लोगों की मौत होती है। स्ट्रोक से पीड़ित व्यक्ति को चेहरे का एक तरफ लटकना ,एक भुजा की कमजोरी, अस्पष्ट एवं लड़खड़ाती आवाज, तेज सिर दर्द, आंखों में काम दिखना या अंधापन, बेहोशी जैसे लक्षण हो सकते हैं। 

मह है स्ट्रोक के कारण

जब मस्तिष्क के किसी भाग में किसी कारण से रक्त नहीं पहुंचता या कम रक्त पहुंचता है तो उस भाग में ऑक्सीजन व पोषक तत्वों की कमी के कारण कोशिकाएं तीब्र गति से मरने लगती हैं व स्ट्रोक हो जाता है । मुख्य रूप से रक्त वाहिकाओं में थक्का जमने( 87 %) या कभी-कभी धमनियों में रक्त स्राव के कारण मस्तिष्क में रक्त प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है । जोखिम के प्रमुख कारकों में हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, ज्यादा कोलेस्ट्रॉल,मोटापा, तंबाकू ,धूम्रपान ,शराब , नशीली गोलियां, दिल की बीमारी, आराम दायक दिनचर्या ,पारिवारिक इतिहास, ज्यादा नींद, मानसिक तनाव, गठिया बात, वायु प्रदूषण, माइग्रेन के कारण सिर दर्द ,किडनी रोग , ए बी ब्लड ग्रुप एवं महिलाओं के प्रमुख कारणों में मीनोपाज , गर्भ निरोधक औषधियों का सेवन, गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप अथवा प्रसव पश्चात है। गंभीर स्वास्थ्य समस्या स्ट्रोक को स्वस्थ जीवन शैली व प्रमुख जोखिम कारकों के प्रबंधन से 80 % तक कम किया जा सकता है।

हमें अपने भोजन में नमक ,घी, तेल,संतृप्त वसा ,मांस बाजार में बने खाद्य पदार्थ का कम उपयोग कर बलड प्रेशर घटाएं डायबिटीज ,वजन ,कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें ,तंबाकू ,धूम्रपान, शराब ,नशीली दवा के सेवन से बचें, नियमित योग ,व्यायाम करें, हरी सब्जी व मौसमी फल का सेवन करें, अपने भोजन में मोटा अनाज (जौ, चना, मक्का, बाजरा, रागी, कोदौ, कुटकी शामिल करें । भारत शासन द्वारा स्ट्रोक के नियंत्रण हेतु असंचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम हेल्थ व वैलनेस सेंटर तक डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग व कैंसर रोग के साथ शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम को सशक्त करने की आवश्यकता है।

बीमारी के त्वरित प्रबंधन हेतु विकासखंड स्तर पर क्रिटिकल केयर यूनिट की स्थापना होना चाहिए । पीड़ित दिव्यांग जनों को बेहतर मासिक पेंशन व पुनर्वास की समुचित व्यवस्था होना चाहिए। परिवार में ब्लड प्रेशर ,डायबिटीज व हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों को जीवन रक्षक औषधियां भोजन के समय खाने की थाली में रखें। स्ट्रोक के संपूर्ण इलाज हेतु विभिन्न विधा के चिकित्सक हैं ।  फिजीशियन, न्यूरोलाजिस्ट, स्पीच थेरापिस्ट ,क्रिटिकल केयर चिकित्सक व फिजियोथैरेपिस्ट।




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सोनम कौर भाटिया

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