October 20, 2024

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विश्व आयोडीन अल्पता दिवस : आयोडीन की कमी शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है घेंघा रोग

मानव शरीर हेतु बहुत उपयोगी




  रीवा। समशेर सिंह गहरवार। पूरी दुनिया में प्रतिवर्ष 21 अक्टूबर को हमारे संतुलित भोजन के महत्वपूर्ण तत्व आयोडीन के हमारे स्वास्थ्य के उपयोग के बारे में आम जन को जागरूक करने हेतु विश्व आयोडीन अल्पता दिवस के रूप में मनाया जाता है। आयोडीन एक खनिज है जो मानव शरीर हेतु बहुत उपयोगी है। आयोडीन थायराइड हार्मोन उत्पादन हेतु आवश्यक खनिज है जो मनुष्य के शारीरिक वृद्धि, विकास व विभिन्न गतिविधियों के सुचारू रूप से संचालन हेतु उपयोगी है।

आयोडीन की कमी को दूर करने के लिए भोजन में आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थ व नमक को शामिल करना चाहिए। सामान्यतया स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन 100- 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की आवश्यकता होती है। आयोडीन के प्रमुख स्रोतों में-  समुद्री भोजन,मछली,दूग्ध उत्पाद ( दूध, दही, पनीर, घी, छाछ ), फलों (केला, जामुन, अमरुद, आंवला, शलजम, चुकंदर, शकरकंद ), सब्जी (पत्तेदार सब्जी, प्याज़, बीन्स, आलू, पालक, लहसून ), अनाज ( मक्का, जौ ), आलू बुखारे, किशमिश, स्ट्रॉबेरी,अंडा है।चिकित्सा विशेषज्ञ  डा. बी. एल .मिश्रा नें बताया कि  अभियान की तर्ज पर आयोडीन युक्त नमक व फोर्टीफाइड चावल में आयोडीन मिलाकर भोजन हेतु ग्रामीण जनों को प्रोत्साहित किया जाता है।  थायराइड ग्रंथ में हारमोंन सामान्य, कम या अधिक मात्रा में हो सकता है।

      संतुलित आयोडीन से थायराइड ग्रंथि करती है कार्य

मनुष्य के शरीर के गले के अगले भाग में तितली के आकार (वजन अनुमानित 20 ग्राम ) की एंडोक्राइन ग्रंथि स्थित होती है जो थायराइड हार्मोन का निर्माण कर शरीर के सुचारू रूप से संचालन में सहयोग करती है। अनुमानित 1/3 पहाड़ी आबादी जहां पानी में आयोडीन का अभाव होता है वहां के लोगों में ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है जिससे घेंघा रोग (गायटर ) कहते हैंजो ब्यक्ति के सौंदर्य को प्रभावित कर सकता है या  उनके गले में सांस नली या आहार नली पर दबाव बना सकता है जिससे उसके  ऑपरेशन की नौबत आ सकती है। जब ग्रंथि कम हार्मोन का निर्माण करती है उस स्थिति को हाइपोथायरॉइडिज्म  व जब ज्यादा निर्माण करती है उस स्थिति को  हाइपरथायरॉइडिज़्म  कहा जाता है।

हाइपोथायरॉइडिज्म होने पर मरीज  को मुख्य लक्षण होते हैं - थकान, वजन बढ़ना, चेहरे में सूजन,ज्यादा ठंडक महसूस होना,जोड़ो व मांसपेशियों में दर्द, शुष्क त्वचा व कम पसीना,मानसिक अवसाद,हृदय दर कम,महिलाओं में माहवारी अनियमितता व बांझपन,  गर्भावस्था में अबॉर्शन ,समय पूर्व प्रसव, नवजात जन्म शिशु में धीमा विकास।

हाइपरथायरॉइडिज़्म में प्रमुख शारीरिक तकलीफ होती है -घबराहट, धड़कन, ज्यादा पसीना आना, वजन कम होना, दस्त आना,नाखून कमजोर होना,त्वचा में रंग परिवर्तन,असहनीय गर्मी,अंधापन, महिलाओं में अबॉर्शन  व  प्रसव के दौरान जटिलताएं। थायराइड ग्रंथि में कैंसर होने की भी संभावना होती है। थायराइड बीमारी के प्रबंधन में औषधियां, रेडियो आयोडीन थेरेपी व सर्जरी का योगदान होता है।

     ये हैं राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता  नियंत्रण कार्यक्रम

 वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञ एवं पूर्व क्षेत्रीय संचालक डॉक्टर बीएल मिश्रा के अनुसार भारत में आम जन में आयोडीन की कमी से दुष्प्रभाव को रोकने हेतु अगस्त 1992 से संपूर्ण देश में राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया  जा रहा है। जिसका उद्देश्य है आयोडीन की कमी से होने वाली व्यापकता को 5 प्रतिशत से नीचे लाना व हर परिवार तक आयोडीन युक्त नमक उपलब्ध कराना। जनमानस में आयोडीन की कमी से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में जागरूकता और संभावित लोगों में थाइरॉएड प्रोफाइल की जांच उप स्वास्थ्य केंद्र यानी हेल्थ वेलनेस सेंटर तक विस्तारित किया जाना चाहिए।

महिलाओं को रसोई में प्रयोग में लाये जाने वाले नमक में आयोडीन जांच विधि मालूम होना चाहिए।  थायराइड की बीमारी से पीड़ित लोगों को चिकित्सा की देखरेख में इलाज करना चाहिए। जिन पहाड़ी इलाकों के पानी में कम मात्रा में आयोडीन हो वहां अभियान चलाकर निशुल्क जांच व इलाज का प्रबंधन स्वास्थ्य विभाग द्वारा होना चाहिए। जिन थायराइड के मरीजों में अन्य बीमारियां दमा, हृदय रोग, ब्लडप्रेशर,डायबिटीज, एनीमिया, गर्भावस्था या अन्य बीमारी हो उन्हें सब का इलाज लेना चाहिए।




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