रीवा। समशेर सिंह गहरवार। हमारी हड्डियां अनमोल हैं जो हमारी सेहत, गतिशीलता और स्वतंत्रता का मूल अधिकार हैं । विभिन्न कारणों से अस्थियों में होने वाले छरण या कम घनत्व को ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है जो एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है इसके संभावित विनाशकारी परिणाम यानी बार-बार हड्डियों का टूटना या फ्रैक्चर हो सकता है। यह बिना लक्षण के "खामोश बीमारी"की तरह होती है जिसमें कभी-कभी कमजोर हड्डियों का फ्रैक्चर हो सकता है। अधिकांशतः महिलाओं में 40 वर्ष उम्र के बाद माहवारी बंद होने के पश्चात व पुरुषों में 70 वर्ष के बाद कभी भी कोई भी हड्डी या ज्यादातर कुल्हा, कमर या कलाई के प्रभावित होने की संभावना रहती है।
विश्व में 20 करोड़ से अधिक लोग ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित हैं जबकि भारत में यह संख्या एक करोड़ से अधिक है। बुजुर्ग हर तीसरी महिला व पांचवां पुरुष इस गंभीर समस्या से पीड़ित हैं। जागरूकता की कमी व कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण मात्र 20% लोग ही स्वास्थ्य लाभ ले पाते हैं। दुनिया के अधिकांश देशों में प्रतिवर्ष 20 अक्टूबर को विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि आमजन को जिससे बीमारी के बचाव, शीघ्र जांच व मजबूत हड्डियों के लिए समुचित इलाज के बारे में जागरूक किया जा सके। इस दिवस की वर्ष 2024 की थीम है_ "नाजुक हड्डियों को कहे ना" तात्पर्य है कि सशक्त भारत हेतु नागरिक को संपूर्ण स्वस्थ बनाने में योगदान करें।
ऑस्टियोपोरोसिस व फ्रैक्चर
अस्थियों में कम घनत्व के कारण कम चोट से भी होते बार-बार फ्रैक्चर व्यक्ति के जीवन को बदल सकते हैं जिसमें उन्हें दर्द, विकलांगता व स्वतंत्रता की क्षति होती है। समाज व परिवारों का कर्तव्य है कि वह "अपनी हड्डियों से ज्यादा प्यार करें व अपने भविष्य की रक्षा करें "। इस समस्या मे पीड़ित को दर्द, ऊंचाई कम हो जाती है व वह झुक सकता है । परिवार और समाज पर आर्थिक बोझ, अस्पतालों में कार्य का बोझ तथा देश पर आर्थिक क्षति के समाधान हेतु जरूरत इस बात की है कि हम जागरूक हो, ऑस्टियोपोरोसिस से बचें व बीमारी होने पर कुशल चिकित्सक से परामर्श करें।
ऑस्टियोपोरोसिस के कारण व बचाव
देश में 'खामोश बीमारी'ऑस्टियोपोरोसिस के प्रमुख कारणों में माहवारी बंद होने के पश्चात महिलाओं में व 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग,कम वजन वाले दुबले पतले,व पतली अस्थियों के लोग,वंशानुगत,हार्मोन की कमी (महिलाओं में इस्ट्रोजन व पुरुषों में टेस्टोस्टेरान), संतुलित भोजन का अभाव (कैल्शियम,विटामिन डी व प्रोटीन की कमी), कुछ बीमारियां( डायबिटीज, गठिया वात,कैंसर,एचआईवी/ एड्स, भोजन में अरुचि ), कुछ औषधियां (स्टेरॉयड,कैंसर,मिर्गी व मानसिक रोग की दवा), आराम दायक जीवन, नशा का उपयोग (तंबाकू,धूम्रपान,शराब), गर्भवती व स्तनपान करने वाली महिलाएं हैं। इस गंभीर बीमारी से बचाव हेतु हमें इन कारणों से बचना चाहिए। भोजन में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा हेतु मांस, मछली,पालक, बीन्स,नींबू,संतरा,बादाम, अखरोट,सूरजमुखी के बीज व दुग्ध तथा दुग्ध उत्पाद पर्याप्त मात्रा में लेना चाहिए।
यह है अपेक्षाएं
वरिष्ठ चिकित्सक एवं पूर्व क्षेत्रीय संचालक डॉक्टर बी एल मिश्रा के अनुसार वैश्विक स्तर पर बढ़ती हुई ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या को दृष्टिगत रखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन की देखरेख में महामारी नियंत्रण की तर्ज पर हड्डियों के स्वास्थ्य व फ्रैक्चर की रोकथाम को वैश्विक स्वास्थ्य एजेंडा में शामिल करना चाहिए । भारत में विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की तर्ज पर ऑस्टियोपोरोसिस को भी शामिल करना चाहिए, जिसमें हेल्थ वेलनेस सेंटर तक बीमारी के बचाव हेतु जन जागरूकता कार्यक्रम,जांच हेतु अस्थियों की डेक्सा जांच व इलाज हेतु उच्च गुणवत्ता की निःशुल्क औषधियों का शासन द्वारा प्रबंधन होना चाहिए।