नागपुर । एड अब्दुल अमानी कुरैशी। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएम जार) द्वारा दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में वर्चुअल ऑटोप्सी (आभासी शवपरीक्षा) के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। इसकी सफलता के तरीके को देखते हुए पोस्टमार्टम किया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती पवार ने भी इस संबंध में एक सूचना दी है।

यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाती है तो नियमानुसार जांच परीक्षण कराया जाता है लेकिन अगर मौत का कारण पहले से ही स्पष्ट है तो बिना अंग- विच्छेद किए एम्स दिल्ली में में सीटी स्कैन एजियोग्राफी की जाती है।
पोस्टमॉर्टम किया जाता है।
जैसे: मृतक को गोली लगने से मृत्यु हो जाती है तो सीटी स्कैन (एमआरआई) किया जाता है। उससे गोली शरीर के आर-पार क्यों गई, कौन-कौन से अंग क्षतिग्रस्त हुए, कितना रक्तस्राव हुआ आदि कारणों का पता चलता है। हार्ट अटैक से मृत्यु के मामले चूंकि इससे मौत का कारण स्पष्ट है. इसलिए शव को क्षत-विक्षत करने की जरूरत नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती पवार ने हाल ही में एम्स नागपुर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने यहां इसी तरीके से पोस्टमॉर्टम करने की सूचना दी थी। इसी के अनुरूप नागपुर एम्स में प्रक्रिया चल रही है। हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय फोरेंसिक मेडिसिन सम्मेलन में, दिल्ली एम्स के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के डॉ. अभिषेक यादव ने यह जानकारी दी थी।
नई पद्धति के क्या लाभ
----------------- नागपुर एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष श्रीगिरिवार के अनुसार शव परीक्षण की इस नई पद्धति से फॉरेंसिक डॉक्टरों के श्रम और समय की बचत होगी। जल्द ही शव परिजनों को सौंपा जा सकता है।
दिल्ही एम्स में वर्चुअल आटोप्सी पद्धति का इस्तेमाल किया जाता है। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती पवार ने नागपुर एम्स में शुरू करने की सूचना दी है। इसके अनुसार प्रक्रिया चल रही है।