नागपूर । एड अब्दुल अमानी कुरैशी। महाराष्ट्र सरकार की "वात्सल्य योजना" पुरे राज्य में लागू की जा रही है। इस संबंध में सरकारी आदेश जारी कर दिया गया है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रसव के दौरान एवं पश्चात मातृ एवं शिशु देखभाल हेतु विभिन्न योजनाएँ क्रियान्वित की जा रही है। नई शुरू की गयी वात्सल्य' योजना के तहत, महिलाओं को गर्भावस्था से पहले और शिशु के 2 वर्ष की आयु में पहुंचने तक सभी आवश्यक गुणात्मक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इस योजना में यह सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष योजना लागू करने का निर्देश दिया।

प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर अवधि के दौरान और बच्चे के दो वर्ष की आयु तक पहुंचने तक सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सूचकांको को जाचते हुए लाभार्थियों को आवश्यक स्तर पर देखभाल मिले यह योजना का मुख्य उद्देश्य है।
स्वास्थ्य में बदलाव लाकर जन्म के समय कम वजन वाले शिशुओं और जन्म दोषों की संख्या को कम करने में मदद करेगी। वात्सल्य योजना में गर्भवती माताओं के आवश्यक परीक्षण किए जाएंगे और उच्च जोखिम वाली माताओं का तुरंत निदान और इलाज किया जाएगा। साथ ही 1000 दिन तक के बच्चों के विकास का मूल्यांकन करने के लिए आवश्यक सेवाएं भी प्रदान की जाएंगी।
समय से पहले जन्म लेने वाले और कम बजन बाले शिशुओं की संख्या को कम करना, जन्म दोषों, प्रसवकालीन मृत्यु दर को कम करना स्वस्थ गर्भावस्था के लिए मातृस्वास्थ्य में सुधार करना, गर्भावस्था से पहले मातृस्वास्थ्य जोखिमों की पहचान करना और निगरानी करना, बच्चे के 1000 दिन के विकास की निगरानी करना, इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।
निधारित की गई स्वस्थ्य सेवाएँ
इस योजना के तहत गर्भधारण पूर्व स्वास्थ्य जांच सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर किया जाता है और अन्य मौजूदा स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ एकीकृत किया जाता है। परिवार नियोजन उपकरणों का उपयोग नहीं करने वाले असुरक्षित दम्पत्ति की जांच, उपचार और परामर्श गर्भधारण अवधि के दौरान माताओं और बच्चों के लिए जोखिमों की पहचान और प्रभावी प्रबंधन, वजन बढ़ने की नियमित निगरानी और उचित देखभाल, बच्चों का विकास, उनपर विशेष ध्यान दिया जाएगा।