अम्बागढ़ चौकी । केजन साहू । नवगठित जिले के अम्बागढ़ चौकी ब्लाक के ग्राम पँचायत मोंगरा उप स्वास्थ्य केंद्र में फैली अव्यवस्था स्वास्थ्य विभाग के व्यवस्था की पोल खोलते नजर आ रही है ।
अव्यवस्था का आलम ये है कि प्रसव के दौरान उपयोग होंने वाले इंजेक्शन एक साल से उपलब्ध नही है और तो और जर्जर हो चुके टेबल पर पांच महीनों तक जच्चा बच्चा दोनों की जान जोखिम में डालकर प्रसव कराया जाता रहा !ज्ञात हो कि उप स्वास्थ्य केंद्र मोंगरा के अंतर्गत चार ग्राम आते है मोंगरा,भड़सेना,कौडूंटोला ,मुजाल जिसकी जनसँख्या 4985 है,दर्ज रिकार्ड के मुताबिक हर महीने तीन से चार केस शिशु प्रजनन के आते है ।
ग्रामवासियों के लिए सबसे सबसे बड़ी समस्या यह है कि मोंगरा स्वास्थ्य केंद्र में 24 घंटे स्वास्थ्य सेवा नही दी जाती है पदस्थ एनएम,सीएचओ शाम होते ही अपना मुख्यालय छोड़ देते है,जबकि स्वास्थ्य केंद्र में आवासीय सुविधा भी दी गई है ! ये इंजेक्शन नही उपलब्ध,प्रजनन के दौरान जीवन रक्षकमैग्नीशियम सल्फेट,ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन गर्भवती महिलाओं एवं प्रजनन के दौरान दी जाने वाली जरूरी दवाइयां है जो कि उप स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध नही है ।
सीएचओ शैलेष कुमार ने बताया कि प्रसव के दौरान ब्लीडिंग कंट्रोल,आसानी से शिशु हो सके इसके लिए ऑक्सीटोसिन दिया जाता है ! इसे लाइफ सेव ड्रग भी कहा जाता है ! ये इंजेक्शन इतना जरूरी होने के बावजूद एक साल से इसकी पूर्ति उप स्वास्थ्य केंद्र में नही होना स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे है ।
पैसे लेकर इलाज, लेने का बताया कारणमोंगरा ग्राम के कुछ ग्रामीणों ने उप स्वास्थ्य केंद्र में पैसा देकर स्वास्थ्य लाभ लेने की बात कही है ! पैसे लेकर इलाज करने के बारे में एनएम से पूछा गया तो उनका कहना था कि प्रसव के दौरान जरूरी इंजेक्शन, दवाइयां विभाग उपलब्ध नही करवा रहा है तो स्वयं के खर्च पर दवाई लाती हूं इसलिए पैसे लेती हूं ।
पांच महीने तक होता रहा जर्जर टेबल पर प्रसवस्वास्थ्य विभाग की इतनी बड़ी लापरवाही की पांच महीने तक जर्जर प्रसव टेबल पर जच्चा और बच्चा दोनों की जान को जोखिम में डालकर प्रसव कराया जाता रहा ! उप स्वास्थ्य केंद्र के एनएम ने बताया कि मेरे द्वारा नये प्रसव टेबल की मांग लगातार की जा रही थी लेकिन नया टेबल पांच महीने बाद ही मिल पाया ।
मोंगरा उप स्वास्थ्य केंद्र में हर महीने तीन से चार डिलवरी केस दर्ज होते है इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि पांच महीने तक 15 से 20 डिलवरी केश जर्जर टेबल पर निपटाया गया ! गर्भवती महिलाओं के प्रसव मामलों में विभाग की इतनी बड़ी लापरवाही जांच का विषय है ।