नई दिल्ली | आकांशा त्रिपाठी | राजधानी के लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए वन हेल्थ पर काम करना जरूरी है। इससे न सिर्फ पर्यावरण, जीव-जंतुओं और इंसानों के स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा, बल्कि दिल्ली के हर परिवार पर होने वाला खर्च भी कम होगा। आंकड़ों के मुताबिक कहा जाता है कि राजधानी दिल्ली में हर परिवार को अपनी कुल आय का 10 फीसदी सालाना स्वास्थ्य पर खर्च करना पड़ता है, जो औसतन 1.36 से 1.50 लाख रुपये के आसपास है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जानकारी देते हुए कहा है कि जिस तरह विकास के लिए मास्टर प्लान 2040 पर काम किया जा रहा है उसी प्रकार दिल्ली सरकार को अभी से स्वास्थ्य के लिए नीतियों पर काम करना जरूरी है। उधर सफदरजंग अस्पताल के सीनियर डॉ. जुगल किशोर ने कहा कोविड19 और पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण अब न सिर्फ दिल्ली, बल्कि पूरे देश और विश्व स्तर पर वन हेल्थ के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।
सफदरजंग अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. जुगल किशोर का कहना है कि सरकारें शहरी विकास को लेकर भविष्य देख रही हैं। इस बीच 18-20 साल आगे की नीतियों पर अभी से काम किया जा रहा है, मगर स्वास्थ्य पर कोई चर्चा तक नहीं करता। दुनिया भर में फैली महामारी कोरोना वायरस की वजह से सरकारें काफी हद तक इसके महत्व को समझ चुकी हैं, लेकिन बीमारियों की रोकथाम को लेकर कोई गंभीर नहीं है।
वहीं लंग्स केयर फाउंडेशन से जुड़े सीनियर डॉ. अरविंद कुमार का कहना है कि अकेले वायु प्रदूषण से दुनियाभर में 70 लाख से ज्यादा मौतें हो रही हैं। जिसमें से 24 लाख मौतें हर साल दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में होती हैं। इसमें भारत भी शामिल है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली वायु प्रदूषण के मामले में दुनिया के सबसे गंभीर शहरों में से एक है अकेले वायु प्रदूषण दिल्ली के लिए सबसे बड़ी समस्या बनता जा रहा है।