March 31, 2022

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लासा फीवर का सबसे गंभीर और खतरनाक लक्षण : जानिए इस बीमारी की जड़




मुंबई | न्यूज़ डेस्क | कोरोना महामारी के बीच नाइजीरिया में तेजी से पांव पसार रहा लासा फीवर दुनियाभर में लोगों के बीच चुनौती बनता जा रहा है। आप सभी को बता दें कि नाइजीरिया सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (एनसीडीसी) के अनुसार नाइजीरिया में इस वर्ष 88 दिनों में लासा फीवर से 123 लोगों की मौत हो चुकी है।

जी हाँ और अब तक 659 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। आप सभी को बता दें कि ब्रिटेन में दो मरीज मिले हैं जबिक एक मौत हुई है। वहीं 25 फीसदी रोगी जो लासा फीवर को मात देते हैं उनमें बहरापन होता है। केवल यही नहीं बल्कि इसमें से आधे मरीजों की एक से तीन महीने में सुनने की क्षमता लौट जाती है।

लासा वायरस बीमारी की जड़- आप सभी को बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार लासा फीवर एक्यूट वायरल हैमोरेजिक फीवर होता है जो लासा वायरस के कारण होता है। जी दरअसल लासा का संबंध वायरसों के परिवार एरिनावायरस से है। मनुष्य आमतौर पर इसकी चपेट में अफ्रीकी मल्टीमैमेट चूहों से आते हैं। कहा जा रहा है घर का सामान या खाद्य पदार्थ जो चूहों के यूरिन और गंदगी से संक्रमित होता है उससे बीमारी फैलती है।

मिली जानकारी के तहत नाइजीरिया में-

  • 21 से 30 वर्ष के लोग सबसे अधिक संक्रमित हुए।
  • 45 स्वास्थ्यकर्मी इस साल बीमारी की चपेट में आए।
  • 36 में से 23 राज्यों में संक्रमण की पुष्टि हुई है।
  • 18.7 फीसदी है मृत्यु दर जनवरी से मार्च के बीच।

80 फीसदी मरीजों में लक्षण नहीं- वहीं डब्ल्यूएचओ के अनुसार लासा फीवर की चपेट में आने वाले 80 फीसदी में संक्रमण का कोई लक्षण नहीं दिखता है। कहा जा रहा है पांच में से एक संक्रमित को गंभीर तकलीफ होती है। इसके अलावा वायरस से शरीर के प्रमुख अंग लिवर, स्प्लीन और किडनी को बुरी तरह प्रभावित होने का साक्ष्य मिला है। जी हाँ और गंभीर मरीजों की मौत का कारण ऑर्गन फेल्योर होता है।

बुखार का 21 दिनों तक असर- मनुष्य पर लासा फीवर का प्रभाव दो से 21 दिन तक रहता है। वहीं अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार इस बीमारी की पहली बार पुष्टि वर्ष 1969 में नाइजीरिया के लासा शहर में हुई थी। जी हाँ और इसके बाद इसका नाम लासा रखा गया था।

कोरोना जैसे लासा के लक्षण- डब्ल्यूएचओ के अनुसार लासा वायरस की चपेट में आने पर व्यक्ति को तेज बुखार्, सिर दर्द, गले में खराश, मांसपेशी में दर्द, सीने में दर्द, डायरिया, खांसी, पेट में दर्द और जी मिचलाना है। वहीं गंभीर मरीजों में चेहरे पर सूजन, फेफड़ों में पानी, मुंह और नाक से खून निकलने लगता है। इसके अलावा मरीज के ब्लड प्रेशर में भी तेजी से गिरावट आने लगती है।




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सोनम कौर भाटिया

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