न्यूज़ डेस्क | कोरोना संक्रमण के इस दौर में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ज्यादातर ऑफिसों ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की सहूलियत दी हुई है। आलम यह है कि कई लोग पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से घर से ही ऑफिस के काम कर रहे हैं।
चारों तरफ फैले जानलेवा वायरस से सरक्षित रहने के लिए तो इसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है, हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय से वर्क फ्रॉम होम के कारण ज्यादातर लोगों में कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं ने जन्म ले लिया है। डॉक्टरों के मुताबिक कई लोगों में ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं का निदान किया जा रहा है, जिसके दीर्घकालिक प्रभाव काफी नुकसानदायक हो सकते हैं।
हाल ही में हुए कई अध्ययनों में भी शोधकर्ता इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि लंबे समय से वर्क फ्रॉम होम कर रहे कर्मचारियों के शारीरिक और मानसिक सेहत पर गंभीर असर देखा जा रहा है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं।
इटली में शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने कर्मचारियों पर वर्क फ्रॉम होम के संभावित साइड-इफेक्ट्स के बारे में पता लगाया। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एनवायर्नमेंटल रिसर्च एंड पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन में कोविड-19 की शुरुआत से घर से काम कर रहे 51 लोगों पर सर्वे किया गया।
अध्ययन के परिणाम में वैज्ञानिकों ने पाया कि इनमें से 41 फीसदी लोगों को पीठ के निचले हिस्से में दर्द और 23.5 फीसदी लोगों ने गर्दन में दर्द की समस्या की शिकायत की। लगभग आधे लोगों ने बताया कि जब से उन्होंने घर से काम करना शुरू किया है तब से उनकी गर्दन का दर्द 50 फीसदी तक बढ़ गया है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि लंबे समय से घर से काम कर रहे ज्यादातर लोगों की रीढ़ की हड्डी झुक गई है। वर्क फ्रॉम होम के कारण लोगों के पॉश्चर में बदलाव आ गया है जिसका सीधा असर उनकी हड़्डियों पर देखने को मिल रहा है। कई लोगों के रीढ़ की हड्डी 120 डिग्री तक झुकने लगी है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके दीर्घकालिक प्रभाव काफी गंभीर हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक वर्क फ्रॉम होम के दौरान लोगों के काम करने का समय और स्क्रीन टाइम, ऑफिस की तुलना में काफी बढ़ गया है। यही कारण है कि ज्यादातर लोगों को धुंधला दिखाई देने की समस्या हो रही है। जॉनसन एंड जॉनसन विजन में ऑप्टोमेट्रिस्ट डेनियल रिचर्डसन कहते हैं-
स्क्रीन पर लोगों का बीतने वाला हर अतिरिक्त घंटा आंखों पर नकारात्मक असर डाल रहा है। आंखों की कमजोरी के साथ-साथ इस वजह से लोगों में तनाव की समस्या भी बढ़ती हुई देखी जा रही है।
न्यू मैक्सिको स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर जगदीश खुबचंदानी कहते हैं-
लंबे समय से घर से काम करने के कारण लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर देखा जा रहा है। अमेरिकी घरों को कार्यालय बनाने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया था, ऐसे में लोगों को तरह-तरह की समस्याएं हो रही हैं।
अधिकतर लोग घर पर ज्यादा देर तक काम कर रहे हैं, जिसके चलते उनका लोगों से मेलजोल कम होता गया है जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा जोखिम है।