नई दिल्ली | आकांक्षा त्रिपाठी |नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के सलाहकार वायरोलॉजिस्ट अक्षय धारीवाल ने कहा कि त्योहारों के दौरान भी लोगों को कोरोना के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है | अभी ऐसा बिल्कुल भी नहीं कहा जा सकता कि कोरोना का खतरा पूरी तरह टल गया है | अभी खतरा पूरी तरह टला नहीं है, इसलिए धनतेरस जैसे त्योहारों पर भीड़ न जुटाएं |
डॉ धारीवाल ने कहा कि लोगों को कोविड एप्रोप्रिएट बिहैवियर मेन्टेन करना बहुत जरूरी है. घर से बाहर निकलें तो मास्क हर वक्त लगाए रखें | ऐसा देखा जा रहा है कि अब कई लोग मास्क को लेकर काफी लापरवाह दिखते हैं, लेकिन अभी वो समय नहीं आया है कि कोरोना से बचाव के तरीके पूरी तरह छोड़कर पहले की तरह रहें. अब कोरोना के बाद जिस तरह न्यू नॉर्मल का माहौल बना है उस तरह अपने व्यवहार को ढालें |
वायरोलॉजिस्ट अक्षय धारीवाल ने थर्ड वेव आने की संभावनाओं को लेकर कहा कि अब भारत में किसी थर्ड वेव आने का खतरा सामने नहीं है | भले ही कोरोना के मामले आते रहेंगे, लेकिन अब दूसरी लहर की तरह कोरोना का कहर भारत में नहीं होगा, इसके पीछे वो वैक्सीनेशन और हर्ड इम्यूनिटी को खास वजह मानते हैं | धारीवाल ने कहा कि अब तक आए सीरो सर्वे में भी यह बात सामने आई है कि देश के बड़े प्रतिशत में हर्ड इम्यूनिटी आ चुकी है |
देश में 100 करोड़ लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है, इसके अलावा बच्चों को लेकर चिंता न करने की बात पहले से ही एक्सपर्ट कह रहे हैं | डॉ धारीवाल का कहना है कि कोरोना थर्ड वेव का ऐसा कोई खतरा अब नहीं है | पेरेंट्स निडर होकर बच्चों को स्कूल भी भेज सकते हैं | उन्होंने कहा कि त्योहार बाद हालात बिगड़ने की उम्मीद न के बराबर है, इसलिए पेरेंट्स त्योहारों के बाद अपनी कंसेंट दे सकते हैं |
पब्लिक पॉलिसी व हेल्थ एक्सपर्ट डॉ चंद्रकांत लहारिया ने aajtak.in ने भी इस मामले में बातचीत की. उन्होंने कहा कि अब माता-पिता को डरने की जरूरत नहीं है | अगर त्योहार के बाद कोरोना के मामले बढ़ते भी तो हैं तो भी नेशनल लेवल पर कोरोना की तीसरी वेव आने का खतरा न के बराबर है | वैसे भी बच्चों को कोरोना का संक्रमण बहुत कम होता है. अगर संक्रमण हुआ भी तो बच्चों में लांग टर्म इसका इफेक्ट नहीं होगा |
डॉ लहारिया ने कहा कि हालिया सीरो सर्वे में सामने आया था कि जून तक 67.6% को एंटीबॉडी बन गई थी | सीरो सर्वे में यह भी देखा गया था, बच्चों में भी एंटीबॉडी बने थे जो एडल्ट की रफ्तार में बने हैं | यही नहीं देश की 100 करोड़ जनता लोगों को कोरोना की एक डोज लग चुकी है | अब त्योहारों से ठीक पहले आए सीरो सर्वे बता रहे हैं कि हर्ड इम्यूनिटी 90 प्रतिशत तक लोगों में आ गई है | इन सब बातों को देखें तो पहली और दूसरी लहर की तरह बड़ी लहर आने की संभावना नहीं है |
डॉ लहारिया कहते हैं कि बच्चों में पहले भी कम गंभीर बीमारी हुई थी | बच्चों में इंफेक्शन होता भी है तो गंभीर बीमारी नहीं होती | अगर अगली लहर आई तो वैसे भी संख्या कम रहेगी, इसलिए बच्चों के स्कूल जरूर खुलने चाहिए | इसको लेकर माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है | उन्होंने कहा कि डेनमार्क-स्वीडन आदि देशों ने स्कूल बंद नहीं किए थे, यहां तक कि अब यूएस में भी लोग बच्चों को स्कूल भेजने लगे हैं |