नई दिल्ली | आकांशा त्रिपाठी | ब्रेस्ट कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा महिलाओं में होता है, लेकिन यह पुरुषों में भी हो सकता है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के आंकड़े इसकी गवाही देते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, हर 8 में से एक महिला में ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका रहती है। इस कैंसर के कुल आंकड़ों में 1 फीसदी तक ब्रेस्ट कैंसर से जूझने वाले पुरुष शामिल हैं।
इसका खतरा भले ही महिला और पुरुष दोनों में रहता है, लेकिन इसके कुछ खास रिस्क फैक्टर हैं, जो दोनों को समझने जरूरी हैं।
हर साल अक्टूबर मंथ को ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के तौर पर मनाया जाता है, ताकि लोगों को इसके खतरे से आगाह किया जा सके।
कौन से रिस्क फैक्टर्स महिलाओं और पुरुषों दोनों में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं, कौन से बदलाव इस बीमारी का इशारा करते हैं और इसे कैसे रोक सकते है | जसलोक हॉस्पिटल, मुम्बई के रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मुकुल रॉय से जानिए इन सवालों के जवाब
पुरुषों में कब हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर
क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम पुरुषों में यह सिंड्रोम होने पर ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ता है। पुरुषों में अतिरिक्त X क्रोमोसोम होने और एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल दूसरों से अधिक होने पर वो इस सिंड्रोम से जूझते हैं। ऐसा होने पर ब्रेस्ट टि्श्यू का विकास अधिक होने लगता है। ऐसे लोगों में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 20 से 60 गुना तक रहता है।
जेनेटिक म्यूटेशन पुरुषों के जीन में बदलाव होने पर भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ता है।
टेस्टिस की समस्या टेस्टिस में मूवमेंट न होना या 2 से अधिक टेस्टिस होने की स्थिति में खतरा बढ़ता है। अगर 2 से अधिक टेस्टिस को सर्जरी से हटा भी देते हैं तो भी ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क बना रहता है।
महिलाओं में रिस्क फैक्टर
शारीरिक बनावट: एक्सपर्ट कहते हैं, महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने का रिस्क ज्यादा रहता है, इसकी वजह है उनके शरीर की बनावट जो पुरुषों से अलग है।
पीरियड्स से कनेक्शन 12 साल की उम्र से पहले पीरियड्स का शुरु होना |
55 साल की उम्र के बाद मेनोपॉज होने पर ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ता है। रिस्क की वजह है लम्बे समय तक एस्ट्रोजन हार्मोन का रिलीज होना।
प्रेग्नेंसी में देरी भी एक वजह अधिक उम्र के बाद बच्चे को जन्म देना या ताउम्र बच्चे का जन्म न देने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क बढ़ता है।
ऐसे रिस्क फैक्टर जो महिला-पुरुष दोनों में खतरा बढ़ाते हैं
अमेरिकन कैंसर सोसायटी कहती है, 70 साल की उम्र तक महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क बढ़ता है। वहीं, पुरुषों में भी औसतन 72 साल की उम्र तक खतरा बना रहता है।
ब्रेस्ट कैंसर से जूझने वाले हर 5 में से एक पुरुष में इसकी वजह आनुवांशिक है। यानी उनके फैमिली मेम्बर्स को कभी न कभी यह कैंसर हुआ है। महिलाओं में फैमिली मेम्बर्स में यह कैंसर होने पर खतरा 1.5 गुना ज्यादा रहता है।
कैसे पता करें कि ब्रेस्ट कैंसर या नहीं
ब्रेस्ट कैंसर की स्थिति में स्तन या बगल में एक या इससे अधिक गांठ महसूस होती है। यह खास तरह की गांठ होती है, इसे समझने की जरूत है। समय-समय पर घर पर इसे चेक करें।
स्तन कैंसर के इलाज के लिए डॉक्टर सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी करते हैं। एक्सपर्ट कहते हैं, जितनी जल्दी इसका पता चल जाए इलाज उतना ही बेहतर होता है। पुरुष और महिला दोनों में इसका इलाज संभव है |