नई दिल्ली | आकांशा त्रिपाठी | देश में आज से 31 अक्टूबर तक स्तन कैंसर जागरुकता माह मनाया जा रहा है | जिसमें महिलाओं को रोजाना बढ़ रही बीमारी ब्रेस्ट कैंसर के प्रति आगाह करने के साथ ही इससे बचने और इलाज कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है लेकिन क्या आप जानती हैं |
आज भारत में ब्रेस्ट कैंसर किस हद तक अपने पैर पसार चुका है | अगर थोड़ी सी लापरवाही हुई तो कोई भी महिला इसकी चपेट में आ सकती है और उसे इलाज के कठिन चरणों से गुजरना पड़ सकता है | खास बात है भारत के मेट्रो शहरों में महिलाओं की एक बड़ी आबादी आज ब्रेस्ट कैंसर के निशाने पर हैं |
दिल्ली स्थित अपोलो अस्पताल की सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रमेश सरीन कहती हैं कि भारत में ब्रेस्ट कैंसर को लेकर एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है | देश में 30 साल के आसपास की महिलाओं में भी इस बीमारी के मामले अब बढ़ने लगे हैं | वहीं करीब 5 फीसदी के आसपास 30 साल से कम उम्र की महिलाएं भी हैं
जो कैंसर की चपेट में आ रही हैं | जबकि अभी तक 50 साल से ऊपर की महिलाओं को ही स्तन कैंसर अपना शिकार बनाता था | वहीं एक और खास बात है कि देश में ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित होने वाली ग्रामीण महिलाओं की अपेक्षा शहरी महिलाओं की संख्या काफी ज्यादा है |
डॉ. सरीन कहती हैं कि भारत सरकार के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में 712,758 महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की बीमारी पाई गई है | प्रति 29 महिलाओं में से एक महिला स्तन कैंसर से जूझ रही है | जहां ग्रामीण महिलाओं में 60 में से एक में ये बीमारी है |
वहीं 22 में से एक शहरी महिला को ब्रेस्ट कैंसर की समस्या है | वहीं इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट बताती हैं कि 2016 में कैंसर के 14.5 लाख नए मामले सामने आए थे जो 2020 में बढ़कर 17.3 लाख हो सकते हैं | वहीं एनसीआरपी के मुताबिक कुल कैंसर मरीजों में करीब 57 फीसदी मामले ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों के हैं | लिहाजा आंकड़े काफी चिंताजनक हैं |
सिर्फ ब्रेस्ट ही नहीं अंडरआर्म की गांठ भी कैंसर का लक्षण
डॉ. सरीन कहती हैं कि अगर ब्रेस्ट में कोई गांठ या मस्सा हो, इसके आकार में बदलाव होने लगे, सूजन के साथ दबाने पर दर्द हो, त्वचा का रंग लाल होने लगे, निपल में से खून आ रहा हो, निप्पल सिकुड़ने लगे, त्चचा में जलन या डिंपलिंग होने लगे, अगर किसी महिला के अंडरआर्म या बगल में गांठ हो तो वह भी स्तन या ब्रेस्ट कैंसर का लक्षण हो सकता है | इसके लिए तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है | महिलाओं को चाहिए कि वे अपने स्तनों की इस प्रकार जांच खुद ही करती रहें |
ब्रेस्ट कैंसर बढ़ने की वजहें जानना है बेहद जरूरी
डॉ सरीन बताती हैं कि देश के बड़े और मेट्रो शहरों में महिलाएं सबसे ज्यादा ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं | इन बड़े शहरों में वे शहर शामिल हैं जहां तेजी से औद्योगीकरण हो रहा है और आधुनिक सुख-सुविधाएं बढ़ने के साथ ही यहां की आबोहवा खराब हो रही है | इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के आंकड़े बताते हैं |
देश के कुछ मेट्रो शहर जैसे दिल्ली, मुंबई, बंगलुरू, भोपाल, कोलकाता चेन्नई और अहमदाबाद में लगातार ऐसी महिलाएं सामने आ रही हैं जिन्हें स्तन कैंसर की शिकायत है | डॉ. कहती हैं कि इन शहरों में मामले सामने आने के पीछे महिलाओं का ज्यादा जागरुक होना भी है लेकिन मामले बढ़ रहे हैं तो यह तय है कि बीमारी बढ़ रही है | इसके अलावा भी कुछ प्रमुख कारण हैं |
भागदौड़ और तनाव भरी जीवनशैली, शारीरिक कसरत या व्यायाम की कमी, प्रदूषित खानपान और पोषणयुक्त भोजन की कमी के कारण भी कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं |
महिलाओं की शादीशुदा जिंदगी का देर से शुरू होना, देरी से बच्चों का होना या संतान का न होना, ग्रामीण के मुकाबले शहरी महिलाओं का जल्दी परिपक्व होना और मासिक चक्र का जल्दी शुरू हो जाना, हार्मोनल असंतुलन भी इसके जिम्मेदार हैं|
कुछ मामलों में अनदेखी या लापरवाही के कारण भी गंभीरता आ जाती है | अगर शुरुआत में ही बीमारी का पता चल जाए तो हालात खराब नहीं होते लेकिन महिलाओं की अपनी बीमारी के प्रति झेलने और लापरवाही का रवैया होने के चलते ज्यादा नुकसान हो रहा है |