मुंबई | ऋषि भट्ट | कहते हैं कि किसी शख्स का स्वभाव पहचानना हो तो ये देखना चाहिए कि वो गरीब लोगों से कैसे पेश आता है. कई लोग ढेरों धन-दौलत जुटा लेते हैं मगर उन्हें ऐसे लोगों से पेश आने का तरीका नहीं पता जो पैसों के मामले में उनसे कमजोर हैं. वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनका गरीबों से काफी लगाव होता है |
हाल ही में एक ब्रिटिश शख्स ने अपनी दरियादिली का प्रदर्शन करते हुए अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा एक होटल के गरीब नौकर को दे दिया. अब उस नौकर को इतनी दौलत मिल चुकी है कि उसे होटल में काम करने की जरूरत ही नहीं है फिर भी वो होटल में काम करना चाहता है |
ब्रिटेन के रहने वाले एक बुजुर्ग शख्स चार्ल्स जॉर्ज कॉर्टनी की हाल ही में मौत हो गई. उनकी मौत के बाद जब उनके परिवार के लोगों ने उनकी विल को पढ़ा तो उन्होंने पाया कि चार्ल्स ने अपनी संपत्ति का काफी हिस्सा एक तुर्की के होटल में काम करने वाले बेलबॉय तास्किन दस्दान के नाम कर दिया है जबकि थोड़ा सा हिस्सा बाकी कर्मचारियों के भी नाम किया है |
ब्रिटेन से जब तुर्की के होटल कोरुर डी लक्स में फोन किया गया और बेलबॉय तास्किन के बारे में ये खबर बताई तो किसी को भी विश्वास नहीं हुआ. फोन पर बताया गया कि चार्ल्स ने तास्किन के अलावा अन्य लोगों के लिए भी कुछ हिस्सा छोड़ा है |
तास्किन इस बात से बेहद खुश है. मिरर वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, तास्किन ने बताया कि चार्ल्स अपनी छुट्टियां मनाने अक्सर तुर्की आते थे और उसी होटल में रुकते थे. वे काफी भले व्यक्ति थे और तास्किन से बेहद इंप्रेस रहते थे. तास्किन 1990 से उस होटल में काम कर रहा है और कई मेहमानों ने ये बताया है कि तास्किन का बात करने का तरीका, और उसका व्यवहार बेहद अच्छा है जिसके कारण लोगों को होटल में अपनापन लगता है. चार्ल्स भी तास्किन से बेहद खुश रहते थे |
एक बार चार्ल्स ने तास्किन को उसके बच्चों की पढ़ाई के लिए कुछ रुपये दिए थे तब से तास्किन भी उनका काफी आदर करने लगा था. रिपोर्ट में इस बात का खुलासा नहीं हुआ है कि चार्ल्स ने बेलबॉय के लिए कितने रुपये छोड़े हैं मगर तास्किन ने बताया कि वो इतने रुपये हैं कि उसे आगे नौकर का काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी मगर इसके बावजूद भी वो होटल में काम करना चाहता है क्योंकि उसका मानना है कि होटल में उसे अलग-अलग लोगों से मिलने और बात करने का अनुभव होता है |
तास्किन ने बताया कि चार्ल्स जब भी उस होटल में आते थे तो 401 नंबर के कमरे में ही रुकते थे. इस वजह से उस होटल में कमरे को ‘चार्ली रूम’ के नाम से पहचाना जाने लगा है |