मुंबई | ऋषि भट्ट | एक वर्ष से भी लंबे अंतराल से कोरोना वायरस ने पूरे विश्व को भयभीत करके रखा है | कोरोना को लेकर कई ग्रंथियां लोगो में फैली हुई है , जिनको समझना और जानना हमारे लिए अति आवश्यक है | यहाँ प्रस्तुत किये गए हैं , नॉर्वे स्तिथ नॉर्डलैंड हॉस्पिटल की एक विख्यात डॉक्टर, डॉ. नताशा मल्होत्रा से V - CAN न्यूज़ के मुंबई के संवादाता ऋषि भट्ट द्वारा की गई बातचीत के कुछ अंश |
डॉ. नताशा ने बताया के लोग आजकल बहुत ही भयभीत हो गए हैं | हर एक छोटे से छोटे हादसे या परिस्थिति को कोरोना से जोड़ कर भयभीत हो जाते हैं | सबसे पहले हमें अपने अंदर का डर करना है | हमारे दिमाग को स्थिर और शांत रखना है | समस्या कितनी भी जटिल क्यों न हो उसका समाधान जरूर होता है |
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डॉ. नताशा ने आगे कहा की सांस लेने तकलीफ का मतलब हर बार कोरोना संक्रमण नहीं हो सकता | लोगों को सांस लेने ज़रा सी भी तकलीफ हो तो उन्हें लगता है की वे संक्रमित हो गए है जब की हर बार ऐसा हो यह ज़रूरी नहीं है | कई बार सांस फूलने का कारन एंग्जायटी (चिंता ), टेंशन या थकान भी हो सकता है | इन सब लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए पर इनको देख के भयभीत भी नहीं होना चाहिए | उन्होंने बताया की यदि आपको सांस फूली हुई लगे तो देखें क्या आपके दिल की धड़कन बढ़ी हुई है ? यदि धड़कन बढ़ी हुई न हो तो ज़्यादा भयभीत न हो |
ऐसी फूली हुई सांस के लिए डॉ. नताशा ने एक सटीक और आसान तरीका बताया है | उन्होंने कहा के ऐसा होने पर अपने हाथ की पहली ऊँगली अपने मुँह में डाले उससे चूसे और फिर साँस लें | ऐसा कुछ देर करने से फूली हुई सांस १००% ठीक हो जाएगी |
कोविद को लेकर उनका कहना है की कोविद के चलते शरीर को ऑक्सीजन मिलना कम हो जाता है जो घातक साबित होता है | जिसके चलते लोगो की जान चली जाती है | कई बार यह देखा गया है की कोविद से ठीक होने के बाद लोगो की मौत हो जाती है | इसके पीछे का कारण और उसका उपाय भी डॉ. नताशा ने बताया है |
उन्होंने बताया के कोविद की वजह से शरीर के अंगो को ऑक्सीजन मिलना कम हो जाता है जिसके चलते उन अंगो के कार्य करने में कमी आ सकती है | उदहारण के तौर पर यदि किसी को कोविद हुआ तो उसकी वजह से उनके फेफड़ो की कार्यक्षमता घट के ६०% हो गई पर कोविद से ठीक होने के बाद मरीज़ को इस बात का पता न चलने पर यह आगे चल कर मुसीबत और परेशानी का कारण बन सकता है |
उन्होंने सलाह दी की कोविद से ठीक होने के बाद मरीज़ को फुल बॉडी चेकअप करवा लेना चाहिए | जिससे की यदि उनके किसी अंग की कार्यक्षमता में कमी आयी हो तो उसका जल्द पता चल जाये और उसका इलाज करवाया जा सके | इससे हम कई जानें बचा सकते हैं |
उन्होंने इस बात पे भी ज़ोर दिया की रेमदेसवीर को किसी भी हालत में वैक्सीन समझ कर घर पे न लिया जाये | उन्होंने कहा की वह एक ऐसी दवाई है जो ज़रूरत पड़ने पर केवल अस्पताल में ही दी जानी चाहिए और वह भी अगर डॉक्टर को आवश्यक लगे तो |
गौरतलब है की डॉ. नताशा मल्होत्रा ने अब तक १०० से ऊपर कोविद मरीज़ो का इलाज किया है और उनकी निगरानी में अभी तक किसी मरीज़ की मृत्यु नहीं हुई |