आउटर दिल्ली | कलीम खान | देश की राजधानी में भी ऑक्सीजन की भारी किल्लत हो गई है। हालात कितने गंभीर हैं, इसके संकेत तब मिले, जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को सोशल मीडिया के जरिए केंद्र सरकार से अपील की। उन्होंने कहा कि कुछ अस्पतालों में तो कुछ ही घंटों की ऑक्सीजन बाकी रह गई है। मैं केंद्र सरकार से हाथ जोड़कर गुजारिश करता हूं कि दिल्ली को तुरंत ऑक्सीजन मुहैया कराएं।
केजरीवाल की अपील के साथ ही डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भी सोशल मीडिया के जरिए दिल्ली के हालात के बारे में बताया। उन्होंने लिखा कि ऑक्सीजन को लेकर सब अस्पतालों से फोन आ रहे हैं। सप्लाई करने वाले लोगों को अलग-अलग राज्यों में रोक दिया जा रहा है। ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर राज्यों के बीच जंगलराज न हो, इसके लिए केंद्र सरकार को बेहद संवेदनशील और सक्रिय रहना होगा।
सिसोदिया ने 18 अस्पतालों की एक लिस्ट भी साझा की। इसमें 8 प्रमुख सरकारी अस्पताल और 10 निजी अस्पतालों में बची हुई ऑक्सीजन का जिक्र था। लिस्ट कहती है कि मंगलवार शाम 6 बजे की स्थिति के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में सबसे ज्यादा अंबेडकर हॉस्पिटल में 24 घंटे की और निजी अस्पतालों में सबसे ज्यादा श्रीअग्रसेन हॉस्पिटल में 48 घंटे की ऑक्सीजन बची है। बाकी अस्पतालों में स्थिति गंभीर है।
कोरोना के बीच ऑक्सीजन की कमी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि इंडस्ट्री ऑक्सीजन सप्लाई के लिए इंतजार कर सकती हैं, कोरोना के मरीज नहीं। इस वक्त इंसानी जिंदगियां दांव पर लगी हैं। कोरोना टेस्टिंग से जुड़ी एक पिटीशन की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा कि यह सुनने में आया है कि दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के चलते वहां के डॉक्टर्स पर दबाव बनाया जा रहा है कि कोरोना मरीजों को दी जा रही ऑक्सीजन कम कर दी जाए। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि ऐसी कौन सी इंडस्ट्रीज हैं जिन्हें ऑक्सीजन सप्लाई कम नहीं की जा सकती?