मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | आचार्य चाणक्य एक श्रेष्ठ विद्वान तो थे ही साथ ही वे एक अच्छे शिक्षक भी थे। इन्होंने विश्वप्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की और वहीं पर आचार्य के पद पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन भी किया। ये एक कुशल कूटनीतिज्ञ, रणनीतिकार और अर्थशास्त्री भी थे। आचार्य चाणक्य ने अपने जीवन में विषम से विषम परिस्थितियों का सामना किया था परंतु कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य को प्राप्त किया।
अगर कोई व्यक्ति की आचार्य चाणक्य की बातों का अनुसरण अपने जीवन में करता है, तो वह जीवन में कभी गलती नहीं करेगा और सफल मुकाम पर पहुंच सकता है। चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य ने उल्लेख किया है कि कैसे लोगों का साथ नहीं रखना चाहिए या फिर किन लोगों का भला नहीं करना चाहिए। इससे आपको शुभ फल नहीं बल्कि सिर्फ कष्ट ही मिलेगा। एक श्लोक के माध्यम से उन्होंने इस बात का जिक्र किया है कि कैसे लोगों से दूर रहना चाहिए।
श्लोक
मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टस्त्रीभरणेन च ।
दुःखितैः सम्प्रयोगेण पण्डितोऽप्यवसीदति ॥
आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में इस श्लोक के माध्यम से बताया है कि प्रत्येक व्यक्ति की इच्छा होती है कि उसका जीवन सरलता पूर्वक बीत जाए और उसे किसी भी प्रकार के कष्ट का सामना न करना पड़े। लेकिन की बार हम जाने अनजाने ऐसा कार्य कर देते हैं जिसका पछतावा हमें आजीवन होता है और इसका हमारे जीवन पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ता है।
आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में कहा कि कभी भी किसी मूर्ख व्यक्ति को ज्ञान नहीं देना चाहिए। क्योंकि आप उसे कितनी भी सही बात बताएंगे लेकिन वह आपसे सदैव तर्क करेगा चाहे वो गलत ही क्यों न हो। इसका अर्थ है कि मूर्ख व्यक्ति कभी भी आपकी बात को समझने का प्रयास नहीं करेगा। ऐसे में आप अपना समय और बुद्धि दोनों ही नष्ट करोगे।
चाणक्य नीति के अनुसार व्यक्ति को ऐसी महिला का पालन पोषण नहीं करना चाहिए जिसके मन में ईर्ष्या हो या वह घर में किसी भी प्रकार की फूट डलवाने का प्रयास करती हो। जो स्त्री घर में क्लेश का कारण बनती है उससे दूरी बना कर रखनी चाहिए। क्योंकि ऐसा करने वाली स्त्री के कारण घर में बरकत नहीं आती और हर चीज का नाश हो जाता है।