मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ पंडित विनोद जी | हरतालिका तीज सुहागिन महिलाओं का एक प्रमुख त्योहार है, जो हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस बार ये पर्व गणेश चतुर्थी के साथ ही 14 सितंबर 2026 को मनाया जा रहा है। इस पर्व वाले दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और शुभ मुहूर्त में शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। यह व्रत निर्जला रखा जाता है यानी इस दिन महिलाएं अन्न-जल कुछ भी ग्रहण नहीं करती हैं। यहां हम आपको बताएंगे हरतालिका तीज की पूजा में किन-किन सामग्रियों की जरूरत होती है।
हरतालिका तीज पूजन सामग्री
बालू या मिट्टी से बनी शिव, पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं ,सुहाग सामग्री (लाल चुनरी, बिंदी, चूड़ियां, आलता, मेहंदी, सिंदूर, कुमकुम, काजल, कंघी, बिछिया, पायल और अन्य श्रृंगार वस्तुएं),रोली,चावल,कपूर,रुई,माचिस,मौली,हल्दी,चंदन,घी का दीपक,अगरबत्ती या धूपबत्ती,फल और मिठाइयां,खीर और हलवा,भिगोए हुए चने,पूजा के लिए ,कलश,जल और गंगाजल,पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, शहद, शक्कर और घी,1 नारियल,दूर्वा घास,बेलपत्र,शमी पत्र,कच्ची हल्दी की गांठें,गेहूं या चावल एक चौकी या आसन ,मंडप बनाने के लिए केले के पत्ते,फूलों की माला और फूल ,पान के पत्ते और सुपारी,कच्चा सूत |
हरतालिका तीज व्रत के नियम क्या हैं?
1. हरतालिका तीज का व्रत निर्जला रखा जाता है।
2.इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।
3.यह व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद खोला जाता है।
कहते हैं हरतालिका तीज व्रत अगर एक बार शुरू कर दिया जाए तो फिर इसे बीच में छोड़ा नहीं जाता। फिर इसे प्रत्येक वर्ष विधि-विधान से किया जाता है।
4. हरतालिका तीज व्रत के दिन रात्रि जागरण का विशेष महत्व माना जाता है।
5.यह सौभाग्यवती स्त्रियों का बड़ा व्रत माना जाता है। कहते हैं इस व्रत को करने से पति को लंबी आयु की प्राप्ति होती है।
6.इस व्रत में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं मिट्टी से तैयार की जाती हैं। फिर इन प्रतिमाओं का पूजा के बाद विसर्जन कर दिया जाता है।
7.इस व्रत के दिन हरतालिका तीज की कथा सुनना बेहद जरूरी माना जाता है।