बालाघाट | न्यूज़ डेस्क | जिले में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है और इसको लेकर जिला प्रशासन पूरी सावधानी बरत रहा है। जिले में कोविड-19 के संक्रमण को फैलने से रोकने एवं कोरोना के संभावित मरीजों का त्वरित उपचार प्रारंभ करने के लिए जिले में नई रणनीति तैयार की गई है। इसी कड़ी में कलेक्टर दीपक आर्य ने आरबीएसके टीम एवं जिला आयुष अधिकारी के अधीनस्थ समस्त आयुष चिकित्सकों की बैठक लेकर उन्हें महत्वपूर्ण दिशा निर्देश दिये।
बैठक में अपर कलेक्टर फ्रेंक नोबल ए, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मनोज पांडेय, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ परेश उपलप, जिला आयुष अधिकारी डॉ शिवराम साकेत, आरबीएसके के जिला कार्यक्रम प्रबंधक डेहरिया, डॉ अंकित असाटी, खंड चिकित्सा अधिकारी एवं आरबीएसके एवं आयुष के चिकित्सक उपस्थित थे।
बैठक में बताया गया कि आरबीएसके एवं आयुष के चिकित्सकों की सम्पूर्ण जिले को अलग-अलग सेक्टर में विभाजित कर ड्यूटी लगाई जा रही है। इन चिकित्सकों को अपने सेक्टर के ग्रामों का भ्रमण कर सर्दी, खांसी, बुखार एवं सांस लेने में तकलीफ वाले मरीजों की मानीटरिंग करना है। कलेक्टर श्री आर्य ने चिकित्सकों से कहा कि हमारा पहला प्रयास यह है कि हम कोरोना के संभावित मरीज को पहचान कर उसका त्वरित उपचार प्रारंभ कर दें और उसके सम्पर्क में आये लोगों को आईसोलेट कर दें। चिकित्सकों को अपने सेक्टर के गांव में 60 से अधिक की आयु के कोरोना के लक्षण वाले ऐसे मरीज मिले तो उसे कोरोना का संभावित मरीज मानकर उपचार प्रारंभ कर देना है। गांव के प्रधान, सचिव एवं आशा कार्यकर्त्ता को हिदायत दें कि वह ऐसे चिन्हित मरीज को घर में अलग रखें और उसे घर से बाहर न निकलने दें।
बैठक में बताया गया कि सभी चिकित्सकों को पल्स आक्सीमीटर एवं थर्मल स्केनर प्रदान किया जा रहा है , जिससे बुखार के मरीजों की पल्स रेट एवं तापमान की जांच कर सकेगें। सभी चिकित्सकों को कहा गया है कि कोरोना के संभावित मरीज के पाये जाने पर उसे कोरोना मरीजों को दी जाने वाली दवाओं का किट प्रदान कर दें। गांवों में सर्दी, खांसी, बुखार एवं सांस लेने में तकलीफ वाले मरीजों की जांच के दौरान चिकित्सकों को मास्क लगाये रखने एवं जरूरत होने पर पीपीई किट भी पहनने कहा गया।
कलेक्टर श्री आर्य ने बैठक में चिकित्सकों से कहा कि उनके द्वारा गत वर्ष कोरोना के संदिग्ध मरीजों की पहचान में अच्छा कार्य किया गया है। इस बार भी वैसे ही लगन एवं उत्साह से कोरोना महामारी पर नियंत्रण के लिए कार्य करने की जरूरत है। इस कार्य के लिए सभी चिकित्सकों को जरूरी संसाधन उपलब्ध कराये जा रहे है। सभी चिकित्सकों को आरबीएसके के अपने कार्यों के साथ ही कोरोना के संभावित मरीजों के उपचार का कार्य करना है।