मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | अक्सर लोगों को आत्मविश्वास से ओत-प्रोत रहने का सुझाव दिया जाता है। मगर एक हालिया अध्ययन की मानें तो अपनी क्षमता पर संदेह करना इतना भी बुरा नहीं। एक नए अध्ययन के अनुसार इंपोस्टर सिंड्रोम वाले लोग जो अपने काम पर कम आत्मविश्वास रखते हैं, उनके पास बेहतर पारस्परिक कौशल होते हैं और यह उसे एक बेहतर कर्मचारी बना सकते हैं।
क्या है इंपोस्टर सिंड्रोम: दरअसल, अपनी क्षमताओं पर संदेह करने की स्थिति को ‘इंपोस्टर सिंड्रोम’ कहा जाता है। इंपोस्टर सिंड्रोम को चिंता और कम आत्म-मूल्य की भावनाओं से जोड़ा गया है, लेकिन हालिया अध्ययन के मुताबिक यह वास्तव में आपको अपने काम में बेहतर बना सकता है।
खुद को सफलता के योग्य नहीं मानते: इम्पोस्टर सिंड्रोम से ग्रस्त लोग दरअसल यह मानते हैं कि वे जीवन में मिली अपनी सफलता के योग्य नहीं है, उन्हें यह अपने प्रयासों या उनकी खुद की क्षमताओं व कौशल से नहीं मिली है, बल्कि उन्हें यह भाग्य के कारण मिली है। सिंड्रोम से पीड़ित लोग खुद को ‘धोखेबाज’ समझने की प्रवृत्ति रखते हैं और वे डरते हैं कि किसी भी क्षण बाकी सभी को भी इसका एहसास हो जाएगा।
सफलता दिलाने में मददगार: नया अध्ययन कैम्ब्रिज में एमआईटी स्लोन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के एक मनोवैज्ञानिक बासिमा ट्वीफिक द्वारा आयोजित किया गया। यह एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट जर्नल में प्रकाशित हुआ है। उन्होंने कहा कि, आमतौर पर इंपोस्टर सिंड्रोम को नुकसानदेह माना जाता है।’
कई पारस्परिक फायदे : मगर अध्ययन के आधार पर इस सिंड्रोम पर हुई बातचीत के आधार पर यह कहा जा सकता है कि इस सिंड्रोम के कई पारस्परिक फायदे भी हो सकते हैं। ट्वीफिक ने इम्पोस्टर सिंड्रोम को ‘सिल्वर लाइनिंग’ कहा है, जो वास्तव में कुछ मामलों में सफलता में योगदान देता है।
अध्ययन के लिए ट्वीफिक ने अमेरिका में एक निवेश सलाहकार फर्म में 155 कर्मचारियों के बीच इस सिंड्रोम के स्तर को मापा। अध्ययन के दौरान प्रतिभागी लिखित बयान के साथ आए और कहा कि कार्यस्थल पर दूसरे लोगों को लगता है कि मेरे पास उससे अधिक जानकारी और क्षमताएं हैं, जितना मुझे खुद लगता है। इस दौरान उनसे यह भी पूछा गया कि ये विचार उनके लिए किस हद तक सही हैं। इसके बाद ट्वीफिक ने प्रत्येक प्रतिभागी के सुपरवाइजर से बातचीत की और उनसे पूछा कि क्या उन्होंने अपने कर्मचारी को इससे अलग तरह से देखा है।
पर्यवेक्षकों ने प्रतिभागियों के प्रदर्शन और पारस्परिक कौशल की रेटिंग के आधार पर मूल्यांकन किया और कहा कि सिंड्रोम वाले कर्मचारी कामकाज में बेहत होते हैं। ट्यूफिक ने पाया कि इम्पोस्टर सिंड्रोम वाले कर्मचारियों ने अधिक आत्मविश्वासी साथियों की तुलना में बेहतर पारस्परिक कौशल में अधिक स्कोर हासिल किया। कार्यस्थल पर वे अधिक सक्षम पाए गए।