नई दिल्ली | न्यूज़ डेस्क | उत्तर पश्चिमी स्कॉटलैंड के कुछ ग्रामीण इलाकों में कई सालों से एक प्रथा चली आ रही है | यहां शादी के कुछ हफ्ते पहले दुल्हन पर कालिख पोती जाती है | इस प्रथा को ब्लैकनिंग कहा जाता है | कई जगहों पर होने वाले दूल्हे और दुल्हन दोनों पर गंदगी डाली जाती है मगर अधिकतर इलाकों में दुल्हन को ही इस प्रथा का शिकार बनाया जाता है | ये काफी लंबे वक्त से चली आ रही मान्यता है | चलिए आपको बताते हैं इस अजीबोगरीब प्रथा के पीछे क्या कारण है |
शादी से पहले जो लड़की दुल्हन बनने वाली होती है उसका खास ख्याल रखा जाता है | उसके सौंदर्य से लेकर खानपान का भी ध्यान रखा जाता है | ऐसा इसलिए होता है जिससे दुल्हन अपनी शादी वाले दिन सबसे अलग और सुंदर लगे | मगर दुनिया में एक ऐसी जगह भी है जहां शादी से पहले दुल्हन पर कालिख होती जाती है और उसे कीचड़, गंदगी से नहलाया जाता है | इस परंपरा के बारे मं जानकर आप दंग हो जाएंगे |
उत्तर पश्चिमी स्कॉटलैंड के कुछ ग्रामीण इलाकों में कई सालों से एक प्रथा चली आ रही है | यहां शादी के कुछ हफ्ते पहले दुल्हन पर कालिख पोती जाती है | इस प्रथा को ब्लैकनिंग कहा जाता है | कई जगहों पर होने वाले दूल्हे और दुल्हन दोनों पर गंदगी डाली जाती है मगर अधिकतर दुल्हन को ही निशाना बनाया जाता है | चलिए आपको बताते हैं इसके पीछे क्या कारण है |
गुड लक के लिए पोती जाती है कालिख
यहां के लोगों का मानना है कि दुल्हन पर कालिख पोतने और उसे गंदी चीजों से नहलाने के बाद उसकी किस्मत चमक जाती है और उसका वैवाहिक जीवन खुशहाल होता है | इस प्रथा में दुल्हन पर काला पेंट, स्याही, कीचड़, अंडे, सड़ा खाना और कई प्रकार की गंदी चीजें फेंकी जाती हैं |
मान्यताओं के अनुसार ऐसा इसलिए किया जाता है जिससे दूल्हा-दूल्हन की जिंदगी खुशहाल हो | साथ ही उन्हें शादी में आने वाली मुसीबतों का सामना करने की भी शक्ति मिले | इसके जरिए दुल्हन को ये बताया जाता है कि शादी सिर्फ गुलब से सजे बिस्तर की तरह आरामदायक नहीं होती है, उसमें कई समस्याएं भी आती हैं इसलिए उसका डटकर सामना करना चाहिए |
कैसे हुई प्रथा की शुरुआत
यूनिवर्सिटी ऑफ एबर्दीन की डॉ. शेला यंग ने इसपर एक रिसर्च की थी जिसके बाद उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत कैसे हुई | उन्होंने बताया कि 19वीं सदी में महिलाओं के पैरों को शादी से पहले साफ करने से इसकी शुरुआत हुई | तब चिमनी से निकलने वाली कालिख को पैर पर पोता जाता था और फिर उसकी सफाई की जाती थी |
20वीं शताब्दी तक ये एक मजेदार रिवाज बन गया और दूल्हा-दुल्हन के दोस्त और परिवार के लोग इसमें शामिल होने लगे | उस वक्त ये खास उन कपल्स के लिए किया जाता था जो गर्मी के मौसम में शादी करते थे | धीरे-धीरे इस रिवाज का विस्तार होता चला गया | अब ये स्कॉटलैंड के कुछ ही हिस्सों में जारी है |