कोलकाता | न्यूज़ डेस्क | कोलकाता के रहने वाले 45 वर्षीय अर्नब मुखर्जी के पेट से सर्जरी करके 10 किलो का ट्यूमर निकाला गया है। डॉक्टर्स का कहना है, सर्जरी से पहले मरीज पेट के तेज दर्द से परेशान था, लेकिन कई दौर की जांचों के बाद ट्यूमर का पता चल पाया। मरीज में रेट्रोपेरिटोनियम सरकोमा कैंसर की पुष्टि हुई है।
इसी साल अगस्त में अर्नब तेज पेट दर्द की शिकायत होने पर स्थानीय डॉक्टर के पास पहुंचे, लेकिन वो ट्यूमर का पता नहीं लगा सके। कुछ समय बाद पेट का आकार चार गुना बढ़ने पर डॉक्टर्स से सम्पर्क किया तो जांच में कैंसरस ट्यूमर की पुष्टि हुई। मरीज में रेट्रोपेरिटोनियम सरकोमा कैंसर का पता चला।
सर्जरी करने वाले कोलकाता के विक्टोरिया मेडिकल सेंटर से सर्जन डॉ. माखनलाल साहा का कहना है, यह बेहद दुर्लभ और गंभीर मामला है। पहली बार जांच में ट्यूमर का पता ही नहीं चल पाया। कई दौर के टेस्ट के बाद इसका पता लगाया जा सका क्योंकि यह आकार में काफी बड़ा था।
यह मामला इसलिए भी खतरनाक था क्योंकि इसका आकार बढ़ता रहा था और शरीर के दूसरों अंगों पर बुरा असर पड़ सकता था। अगर इसे हटाया न जाता तो मरीज की मौत का खतरा था। 2 अक्टूबर को हुई सर्जरी करीब 4 घंटे चली। खास बात रही कि सर्जरी के दौरान शरीर के दूसरों अंगों को नुकसान नहीं हुआ।
डॉ. माखनलाल कहते हैं, मरीज की हालत अब स्थिर है और लिक्विड फूड ले रहा है। सर्जरी के बाद अब कैंसर का इलाज कीमोथैरेपी और दवाओं से किया जा रहा है ताकि दोबारा ऐसे ट्यूमर को होने से रोका जा सके।
वह कहते हैं, मरीज में मैलिग्नेंट ट्यूमर था। यह ऐसा कैंसरस ट्यूमर होता है जो तेजी से बढ़ता है। मरीज की सर्जरी में कई चुनौतियां थी। जैसे यह ट्यूमर मरीज की रेट्रोपेरिटोनिम में विकसित हो रहा था। यह ऐसी जगह है जहां शरीर की प्रमुख रक्त वाहिकाएं, किडनी, पेन्क्रियाज और ब्लैडर मौजूद रहता है।
शरीर के किसी अंग को बिना नुकसान पहुंचाए इस हिस्से से ट्यूमर को निकालना चुनौतीभरा था।
क्या होता है रेट्रोपेरिटोनियल सरकोमा कैंसर
डॉ. मुखर्जी कहते हैं, इस कैंसर का सबसे ज्यादा असर पेट पर पड़ता है और पेट का आकार बढ़ता है। हालांकि अर्नब के मामले में पेट कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था। ऐसे मामलों में पेट में दर्द के अलावा हर्निया और एनीमिया की स्थिति भी बन सकती है।