नई दिल्ली | न्यूज़ डेस्क | बीते कुछ सालों से भारत में स्वच्छ भारत अभियान चलाया जा रहा है | इसके तहत लोगों को घर के अंदर ही टॉयलेट बनाकर बाहर गंदगी ना फैलाने की अपील की गई थी | आपने दो तरह के टॉयलेट देखे होंगे |
एक इंडियन और एक वेस्टर्न | इसके अलावा पहले के समय में लोग खेतों या खाली मैदानों का ही इस्तेमाल करते थे | लेकिन धीरे-धीरे घरों में टॉयलेट बन गए और अब लोग उसी का इस्तेमाल करते हैं | लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आज से हजारों साल पहले अमीर लोग कैसे टॉयलेट का इस्तेमाल करते थे |
हाल ही में यरुशलम के कुछ खोजकर्ताओं के हाथ एक प्राइवेट टॉयलेट मिला | इसे किसी का प्राइवेट स्नानघर बताया जा रहा है | बताया जा रहा है कि ये उस दौर के किसी अमीर शख्स का प्राइवेट बाथरूम होगा | ये हर किसी के घर में मिलना असंभव है. इसे उस दौर का कोई रईस आदमी ही बनवा सकता था | इसे यरुशलम के अरमैन हणटजीव में ढूंढा गया |
टाइम्स ऑफ़ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक़, अभी तक ऐसे प्राइवेट टॉयलेट काफी कम मिले हैं. इस बार जो टॉयलेट हाथ लगा है वो काफी चिकना है. ये एक नक्काशीदार चूना पत्थर से बना टॉयलेट है |
इसे आराम से बैठने के लिए बनाया गया है | साथ ही इसके छेद के नीच एक गहरा टैंक खोदा गया था | जिस जगह पर ये टॉयलेट मिला वहां पहले एक आलीशान हवेली थी | खोजकर्ताओं का कहना है कि अभी तक मिले ऐसे टॉयलेट इसी तरह की हवेलियों में मौजूद थे |
जब खोजकर्ताओं ने इस तरह के टॉयलेट्स के सेप्टिक टैंक की तलाशी ली तो हैरान रह गए | इन सेप्टिक टैंक में उन्हें जानवरों की हड्डियां और मिट्टी के बर्तन मिले | अभी इसकी और जांच की जा रही है |
कहा जा है कि जांच में ये पता चलेगा कि उस समय लोगों का खान पान कैसा था | इसके अलावा उन्हें किस तरह की बीमारियां होती थी, ये भी सेप्टिक टैंक की जांच से पता लगाने की कोशिश की जा रही है |