लेखक | डॉ. अशोक कुमार वर्मा | भोजन जीवन का आधार है और भूखे को भोजन कराना मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है। प्रत्येक वर्ष 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस और विश्व रोटी दिवस मनाया जाता है। यह दिवस हमें स्मरण कराता है कि संसार में कोई भी व्यक्ति भूख और कुपोषण से पीड़ित न रहे तथा प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो। इस अवसर पर रोटी बैंक की सेवा यात्रा हमें सिखाती है कि रोटी केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि करुणा, समानता, संवेदना और मानवीय गरिमा का प्रतीक भी है। हरियाणा में रोटी बैंक की स्थापना का श्रेय तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्रीकांत जाधव, आईपीएस को जाता है। वर्ष 2017 में उनके प्रयासों से रोटी बैंक की अवधारणा को विशेष प्रोत्साहन मिला।
हरियाणा पुलिस अकादमी, मधुबन से रोटी बैंक का शुभारंभ करते हुए उन्होंने समाज के सामने भूख की समस्या का एक संवेदनशील पक्ष रखा। वे प्रायः कहते हैं कि प्रत्येक घर में यह चर्चा होती है कि आज भोजन में क्या बनेगा, जबकि अनेक परिवार ऐसे भी हैं जिनके सामने यह चिंता रहती है कि आज भोजन मिलेगा भी या नहीं। उनका संदेश था कि हम सभी का पेट तो नहीं भर सकते, लेकिन कुछ लोगों को एक समय का भोजन उपलब्ध कराना भी बहुत बड़ी बात है। यही विचार रोटी बैंक की सेवा भावना का आधार बना और अनेक लोगों को जरूरतमंदों की सहायता के लिए प्रेरित किया।
इसी प्रेरणा, मार्गदर्शन और सहयोग से 16 मई 2018 को धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में रोटी बैंक की स्थापना की गई। इस सेवा यात्रा में पुलिसकर्मियों, समाजसेवियों, दानदाताओं और सेवाभावी नागरिकों का सहयोग निरंतर मिलता रहा है। रोटी बैंक की विशेषता वर्ष के 365 दिन केवल भोजन वितरित करना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों तक नियमित रूप से पहुंचना और कठिन परिस्थितियों में उनके साथ खड़े रहना है। कुरुक्षेत्र स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में प्रतिदिन प्रातः जरूरतमंदों और उनके परिजनों को दूध, रस तथा चाय उपलब्ध कराई जाती है।
इसके बाद लोकनायक जयप्रकाश नागरिक अस्पताल में भोजन वितरित किया जाता है। उपचार के लिए आने वाले अनेक उपचारधीनों के परिजन आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हैं। ऐसे समय में भोजन मिलना उनके लिए बड़ी सुविधा बनता है। रोटी बैंक का प्रयास है कि व्याधि और संकट का सामना कर रहे परिवारों को कम से कम भोजन की चिंता न करनी पड़े। यह सेवा उनके कठिन समय में सहारा बनने के साथ-साथ समाज में अपनत्व और विश्वास की भावना भी सुदृढ़ करती है।
इस सेवा का विस्तार ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले श्रमिक परिवारों और उनके बच्चों तक भी है। जरूरत और उपलब्धता के अनुसार दाल-चावल, कढ़ी-चावल, राजमा-चावल तथा छोले-चावल जैसे भोजन वितरित किए जाते हैं। विशेष अवसरों पर खीर, हलवा और पूड़ी भी परोसी जाती है। भोजन तैयार करने और वितरित करने में जरूरतमंदों की आवश्यकताओं, परिस्थितियों तथा सहयोगियों की सहभागिता का ध्यान रखा जाता है। इस प्रकार सेवा का उद्देश्य केवल भूख मिटाना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों को सम्मानपूर्वक भोजन उपलब्ध कराना भी है।
रोटी बैंक का एक भावनात्मक पक्ष भी है। अनेक लोग अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगाँठ अथवा प्रियजनों की पुण्यतिथि पर जरूरतमंदों को भोजन कराते हैं। इस प्रकार व्यक्तिगत खुशियाँ और अपनों की स्मृतियाँ सामाजिक सेवा का माध्यम बन जाती हैं। किसी दिवंगत परिजन की स्मृति में भूखे को भोजन कराना श्रद्धांजलि का ऐसा मानवीय रूप है, जिसमें संवेदना, सेवा और परोपकार का सुंदर संगम दिखाई देता है। इससे अन्न के सम्मान और दूसरों के दुख-दर्द को समझने की भावना मजबूत होती है।
विश्व खाद्य दिवस हमें भोजन की उपलब्धता के साथ-साथ अन्न का सम्मान करने और उसकी बर्बादी रोकने का संदेश भी देता है। विवाह समारोहों, सामाजिक आयोजनों और घरों में भोजन की आवश्यकता का उचित आकलन किया जाना चाहिए। सुरक्षित और उपयोग योग्य अतिरिक्त भोजन को उचित व्यवस्था के माध्यम से जरूरतमंदों तक पहुंचाया जा सकता है। प्रत्येक समर्थ परिवार यदि अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद के भोजन की जिम्मेदारी उठाए, तो भूख की समस्या कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
रोटी बैंक सामूहिक संवेदना और सहयोग का परिणाम है। अब सेवानिवृत अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्रीकांत जाधव, आईपीएस की प्रेरणा से आगे बढ़ी यह सेवा भावना पुलिसकर्मियों, समाजसेवियों, दानदाताओं और नागरिकों की सहभागिता से निरंतर मजबूत होती है। कोई आर्थिक सहायता देकर, कोई भोजन उपलब्ध कराकर और कोई अपना समय देकर इस पुनीत कार्य का भागीदार बन सकता है। समाज की वास्तविक समृद्धि केवल धन-संपदा से नहीं, बल्कि इस बात से भी मापी जाती है कि उसमें जरूरतमंदों के प्रति कितनी संवेदना है।
आइए, विश्व खाद्य दिवस पर संकल्प लें कि अन्न का सम्मान करेंगे, भोजन की बर्बादी रोकेंगे और अपनी सामर्थ्य के अनुसार भूखे को भोजन उपलब्ध कराने में योगदान देंगे। क्योंकि जब किसी भूखे को रोटी मिलती है, तब केवल उसका पेट नहीं भरता, बल्कि मानवता और सामाजिक विश्वास भी मजबूत होते हैं। यही रोटी बैंक का मूल संदेश और विश्व खाद्य दिवस की सच्ची सार्थकता है।