विशेष लेख : डॉ. अशोक कुमार वर्मा । भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि साधारण परिस्थितियों में जन्म लेने वाला व्यक्ति भी असाधारण संकल्प, कठिन परिश्रम, अनुशासन और ज्ञान के बल पर असाधारण ऊँचाइयाँ प्राप्त कर सकता है। 15 अक्टूबर को उनकी जयंती मनाई जाती है। भारत में इस दिन को विद्यार्थी दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। यह अवसर विद्यार्थियों को उनके विचारों से प्रेरणा लेने, अपने लक्ष्य निर्धारित करने और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने का संदेश देता है। डॉ. कलाम का जीवन विद्यार्थियों को सिखाता है कि सपने केवल देखने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें साकार करने के लिए होते हैं।
उन्होंने विज्ञान, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में अपने योगदान से भारत का गौरव बढ़ाया। उनका विश्वास था कि देश का वास्तविक भविष्य उसकी युवा पीढ़ी के विचारों, चरित्र और कर्मों में छिपा है। आज के विद्यार्थियों के सामने अवसरों के साथ अनेक चुनौतियाँ भी हैं। प्रतिस्पर्धा, परीक्षा का दबाव, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग, अनुचित संगति और नशे जैसे प्रलोभन उनके भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे समय में डॉ. कलाम के विचार और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। सफलता का कोई सरल विकल्प नहीं है; इसके लिए नियमित अध्ययन, आत्मविश्वास, धैर्य और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
विद्यार्थी जीवन मानव जीवन की वह अवस्था है, जिसमें व्यक्तित्व, विचार और आदतों का निर्माण होता है। इस आयु में अपनाई गई अच्छी आदतें जीवनभर साथ रहती हैं, जबकि गलत आदतें भविष्य के मार्ग में बाधा बन सकती हैं। नशीले पदार्थों का सेवन व्यक्ति की शारीरिक क्षमता, मानसिक संतुलन, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है। इसलिए नशे से दूर रहना केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि अपने परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी भी है। नशे के विरुद्ध जागरूकता केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। विद्यालयों, महाविद्यालयों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी दी जानी चाहिए। उन्हें यह भी समझाना चाहिए कि किसी मित्र के नशे की ओर बढ़ने पर उसका उपहास करने के बजाय उसे समझाएँ और आवश्यकता पड़ने पर उसके परिवार, शिक्षक अथवा विशेषज्ञ की सहायता लें। हरियाणा राज्य नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो द्वारा संचालित नशामुक्ति जागरूकता अभियानों का मूल संदेश भी यही है कि युवा अपनी ऊर्जा को शिक्षा, खेल, योग, रचनात्मक गतिविधियों और समाजसेवा में लगाएँ। “नशा छोड़ो, जीवन से नाता जोड़ो” केवल एक नारा नहीं, बल्कि स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। विद्यार्थी केवल अपने परिवार का भविष्य नहीं होते, वे राष्ट्र की प्रगति के आधार भी होते हैं। यदि प्रत्येक विद्यार्थी नशे से दूर रहने, यातायात नियमों का पालन करने, पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने, स्वच्छता बनाए रखने और रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प ले, तो समाज में व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है। विशेष रूप से छात्राएँ परिवार और समाज में जागरूकता की सशक्त वाहक बन सकती हैं। वे अपने भाइयों, मित्रों और परिवार के अन्य सदस्यों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। इसी प्रकार विद्यार्थी अपने विद्यालयों में जागरूकता समूह बनाकर नशामुक्ति, पौधारोपण, सड़क सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी अभियानों में भाग ले सकते हैं। इस प्रकार शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनना भी है।
डॉ. कलाम के जीवन से यह प्रेरणा मिलती है कि ज्ञान तभी सार्थक होता है, जब उसका उपयोग मानवता के कल्याण में किया जाए। विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता, सत्यनिष्ठा और अनुशासन को भी अपने जीवन का अंग बनाना चाहिए। राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल उसकी आर्थिक समृद्धि अथवा वैज्ञानिक उपलब्धियों से नहीं मापी जाती, बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र, सामाजिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों से भी पहचानी जाती है। एक शिक्षित व्यक्ति यदि ईमानदार, संवेदनशील और कर्तव्यनिष्ठ नहीं है, तो उसकी शिक्षा अधूरी है। इसके विपरीत, ज्ञान के साथ संस्कार रखने वाला विद्यार्थी समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। अभिभावकों और शिक्षकों का दायित्व है कि वे बच्चों पर केवल अंकों और उपलब्धियों का दबाव न डालें, बल्कि उनकी रुचियों, मानसिक स्वास्थ्य और नैतिक विकास पर भी ध्यान दें। विद्यार्थियों की समस्याओं को सुनना, उनका मार्गदर्शन करना और असफलताओं से सीखने के लिए प्रेरित करना आवश्यक है। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब विद्यार्थी उनके विचारों को अपने आचरण में उतारेंगे। प्रत्येक विद्यार्थी अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करे, नियमित अध्ययन करे, माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करे, नशे से दूर रहे तथा समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करे। आज आवश्यकता ऐसे युवाओं की है, जिनके सपने ऊँचे हों, विचार सकारात्मक हों, चरित्र दृढ़ हो और जिनकी प्रतिभा का उपयोग मानवता की सेवा में हो। विद्यार्थी जब स्वयं अनुशासित, जागरूक और नशामुक्त बनेंगे, तभी उनके माध्यम से परिवार, समाज और राष्ट्र भी सशक्त बनेंगे। आइए, 15 अक्टूबर पर संकल्प लें कि हम डॉ. कलाम के सपनों का ऐसा भारत बनाएँगे, जहाँ प्रत्येक विद्यार्थी शिक्षित हो, प्रत्येक युवा नशे से दूर हो, प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्य के प्रति सजग हो और राष्ट्र का भविष्य ज्ञान, संस्कार, विज्ञान तथा मानवता के प्रकाश से आलोकित हो। यही विद्यार्थी दिवस का संदेश है और यही डॉ. कलाम के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि।