नागपुर । अब्दुल अमानी कुरैशी। सरकार द्वारा छात्रवृति की रकम समय पर नहीं दिये जाने की वजह से न केवल कॉलेज बल्कि छात्रों की भी मुसीबत बढ़ गई है. राज्यभर के प्रोफेशनल पाठ्यक्रम वाले कॉलेजों को अनुसूचित जाति प्रवर्ग के छात्रों की ट्यूशन फीस छात्रवृति नहीं मिली है. वहीं छात्रों को मिलने वाली परीक्षा फीस और निर्वाह भत्ते के लिए भी दो वर्ष से इंतजार करना पड़ रहा है।

जरूरतमंद छात्रों के लिए मुश्किलें दिनोंदिन बढ़ती जा रही हैं लेकिन सरकार है कि मामले को जरा भी गंभीरता से नहीं ले रही है. केंद्र सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के छात्रों को दी जाने वाली ट्यूशन फीस के 60 फीसदी हिस्से की रकम का भुगतान शैक्षणिकसत्र 2021-22 से रोक दिये जाने से राज्य के सभी इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक, आर्किटेक्चर, फार्मेसी, एमबीए, वैद्यकीय सहित व्यावसायिक पाठ्यक्रम वाले कॉलेजों की आर्थिक हालत बिगड़ गई है. कॉलेजों को तो रकम मिली ही नहीं जबकि छात्रों के हिस्से में जमा होने वाली रकम भी अब तक नहीं मिली है. छात्रवृति के तौर पर छात्रों को हर वर्ष 8,000-9,000 निर्वाह भत्ता मिलता है. वहीं परीक्षा फीस भी मिलती है।
दरअसल ट्यूशन फीस छात्रवृति और उक्त भत्ते भी एक साथ ही मिलते हैं लेकिन दो वर्ष से छात्रों को अनुदान नहीं मिल रहा है. यही वजह है कि निर्धन व जरूरतमंद छात्रों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. हर कॉलेज में अनुसूचित जाती के करीब 20-30 फीसदी छात्र होते हैं जो छात्र छात्रवृति के भरोसे पढ़ाई करते हैं, उनके सामने संकट पैदा हो गया है. छात्र कॉलेज में प्राध्यापकों से सवाल कर रहे हैं लेकिन प्राध्यापक सहित प्राचार्य भी नहीं जानते कि सरकार कब अनुदान देगी. केवल प्रोफेशनल ही नहीं बल्कि पारंपरिक पाठ्यक्रम वाले छात्रों को भी भारत सरकार की छात्रवृति का अनुदान नहीं मिला है. यही वजह है कि छात्रों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
करीब 2,400 रुपये होती है. यानी एक वर्ष के करीब 5,000 रुपये मिलते हैं. वहीं ऑटोनॉमस कॉलेजों की फीस 4,500 रुपये यानी एक वर्ष के करीब 9,000 रुपये मिलते हैं.।