रायपुर | मिनल केडेकर | जंतर-मंतर में देश की मासूम बेटियों पर किए गए अमानवीय कृत्य को लेकर कांग्रेस नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट और बच्चियों के समर्थन में किए गए कमेंट पर राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष द्वारा एफआईआर के निर्देश को महिला विरोधी कृत्य बताते हुए प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने कहा है कि दलीय चाटुकारिता में ममता साहू अपनी संवैधानिक मर्यादा और असल कर्तव्य को भूल चुकी है। महिला आयोग का काम महिलाओं के साथ हुए अन्याय, अत्याचार पर संज्ञान लेना है, लेकिन छत्तीसगढ़ की महिला आयोग बेटियों के गुनहगारों के साथ खड़ी है। पद का दुरुपयोग करके अनुचित दबाव बनाना, बेटियों के हित के खिलाफ, अन्यायी अत्याचारीयों के साथ खड़ा होना भी अपराध है। जो लोग प्रोटेस्ट में बेटियों पर हुये जुल्म के खिलाफ लिखे, महिला आयोग उन्हीं के खिलाफ कार्यवाही चाहती है | पीड़ितों को ही प्रताड़ित करना और अत्याचारियों का संरक्षण करना ही भाजपा नेताओं का चरित्र बन गया है, जरा भी नैतिकता बाकि है तो महिला आयोग से इस्तीफा दे ममता साहू।
प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने कहा है कि हाल ही में छत्तीसगढ़ के जगदलपुर की रहने वाली 20 वर्षीय नीट छात्रा सुरला हारिका राव नायडू ने इस सरकार और सरकारी सिस्टम से व्यथित होकर मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या कर ली, 21 से अधिक होनहारों की शहादत इस हत्यारी सरकार की वजह से हुई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे नीट पेपर लीक विरोधी आंदोलन में शामिल होने जा रही छत्तीसगढ़ की एक अन्य छात्रा की सड़क हादसे में दुखद मृत्यु हो गई, राज्य महिला आयोग की इस पर चुप्पी क्यों ?
प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ महिला आयोग भाजपा के मोर्चा संगठन के तौर पर काम कर रही है। देश की बेटियों के गुनहगारों को बचाने के लिए सीमाएं लांघ कर सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने का कुत्सित प्रयास कर रही है। फेसबुक और इंस्टाग्राम में बच्चियों पर बर्बरता के हजारों वीडियो और फोटो भरे पड़े हैं, उन बेटियों का दर्द कब महसूस कब होगा? कब उन मामलों में स्वतः संज्ञान लेंगे? क्या महिला आयोग महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में उठने वाले सवालों को दबाने के लिए है?
प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने कहा है कि देशभर के जेन-जी प्रदर्शन में शामिल थे, छत्तीसगढ़ से भी छात्राएं गयी थीं, क्या महिला आयोग यह बता पाएगी कि उनके साथ क्या हुआ? महिला छात्रों पर पुरूष पुलिसकर्मियों ने बेरहमी से हमला किया गया, जानबूझकर उनके निजी अंगों को भी निशाना बनाया गया, घातक पेलेट गन का स्तेमाल हुआ जिसमें आउट लुक के एक पत्रकार सहित दर्जनों प्रदर्शनकारी घायल हैं, सादे कपड़ों में बेटियों को लाठियों से पीटते हुए दिखे, क्या वे पुलिसकर्मी थे? कुचले गए, कपड़े फटे, खाना, पानी रोका गया खिले लगे डंडे, आशुगैस के गोले छात्राओं पर चले हैं, महिला आयोग की जवाबदेही क्या है?