मुंबई । हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी । एक पखवारे के भीतर दो ग्रहण का होना विश्व के लिए शुभ नहीं है। महाभारत काल में भी 15 दिन में दो सूर्यग्रहण लगा था। उस समय महायुद्ध हुआ जिसमें लाखों लोग हताहत हुए थे ।
हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी ने V CAN न्यूज को बताया की पं. शिवपूजन चतुर्वेदी ने खगोलीय घटना के प्रभावों पर विमर्श के लिए वैदिक एजुकेशनल रिसर्च सोसायटी की ओर से आयोजित परिचर्चा में कहा कि वर्तमान में भी विश्व में सर्वत्र तनाव है। दुनिया विश्वयुद्ध के कगार पर खड़ी है। मानवता के समक्ष घोर संकट है।
विश्व में लोग अभाव, भुखमरी और गहन शारीरिक-मानसिक तनाव से त्रस्त हैं। कोई समाधान नहीं समझ आ रहा। ऐसी स्थिति में मानवीय ज्ञान के अन्यतम श्रोत वेदों की शरण जाने के सिवा कोई मार्ग नहीं है। उन्होंने कहा कि वेदों में महाविनाश और अनिष्ट टालने के लिए अचूक मंत्र और यज्ञों के विधान हैं। जिन्हें अपनाकर विश्व को बचाया जा सकता है ।
भारत में सूर्यग्रहण काल: 25 अक्टूबर - स्पर्श: शाम 04:42 बजे -मध्यकाल: शाम 05: 02 बजे-मोक्षकाल: शाम 05: 22 बजे-सूर्यास्त: शाम 05: 37 बजे-सूर्यग्रहण सूर्यास्त से 15 मिनट पूर्व समाप्त हो जाएगा-सूर्यग्रहण की सम्पूर्ण अवधि 7 घंटा 5 मिनट है किन्तु भारत में सम्पूर्ण सूर्यग्रहण 40 मिनट का है - 8 नवम्बर को खग्रास चंद्रग्रहण दृश्य होगा ।
ग्रहण का राशियों पर प्रभाव
इस वर्ष तुला राशि पर सूर्यग्रहण है। विभिन्न राशियों पर प्रभाव इस प्रकार होंगे। मेष राशि: स्त्री पीड़ा, वृष: सौख्य, मिथुन: चिन्ता, कर्क: व्यथा, सिंह: श्रीप्राप्ति, कन्या: क्षति, तुला: घात, वृश्चिक: हानि , धनु: लाभ, मकर: सुख, कुम्भ: माननाश, मीन: मृत्यतुल्य कष्ट।
इस बार 25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण लग रहा है। सूर्य ग्रहण शाम 4:42 बजे से 5:222 बजे तक रहेगा। इससे 12 घंटे पहले ग्रहण का सूतक काल शुरू हो जाएगा। यानी 24 अक्टूबर से ही सूर्य ग्रहण शुरू हो जाएगा। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं ।