मुंबई | ऋषि भट्ट | अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा का विसर्जन होता है | गणेश चुतर्थी के दिन लोग अपने घरों में गणेश जी की प्रतिमा का स्थापित करते हैं. फिर इन्हें पूरे आदर-सत्कार के साथ एक, तीन, पांच या दस दिन अपने घर पर रखते हैं और इसके बाद इनका विधि-विधान के साथ विसर्जन करते हैं |
क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर गणपति बप्पा का विसर्जन क्यों किया जाता है इसके पीछे एक पौराणिक कथा है. आइए जानते हैं उसके बारे में |
गणेश विसर्जन पौराणिक कथा
माना जाता है कि अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणपति को जल में विसर्जित कर दिया जाता है क्योंकि वो जल तत्व के अधिपति हैं | पुराणों के अनुसार, वेद व्यास जी भगवान गणेश को कथा सुनाते थे और बप्पा उसे लिखते थे. कथा सुनाते समय वेद व्यास जी ने अपने नेत्र बंद कर लिए | वो 10 दिन तक कथा सुनाते गए और बप्पा उसे लिखते गए |
लेकिन जब दस दिन बाद वेद व्यास जी ने अपने नेत्र खोले तो देखा कि गणपति जी के शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया था | वेद व्यास जी ने उनका शरीर ठंडा करने के लिए ही उन्हें जल में डुबा दिया जिससे उनका शरीर ठंडा हो गया | कहा जाता है कि उसी समय से यह मान्यता चली आ रही है कि गणेश जी को शीतल करने के लिए ही गणेश विसर्जन किया जाता है |
बप्पा का विसर्जन करने के लिए सबसे पहले सुबह स्नान करने के बाद गणेश जी की पूजा करें और उनके प्रिय चीजों का भोग लगाएं | पूजा के दौरान गणेश मंत्र और गणेश आरती का पाठ करें. इस दौरान स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं और बप्पा के विसर्जन की तैयारियां शुर कर दें |