नागपुर | एड अब्दुल अमानी कुरेशी | "मानव सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है" के महान सिद्धांत को साकार करते हुए साहित्यसम्राट लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे की स्मृति दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की विशेषज्ञ समूह समिति के सदस्य, महाराष्ट्र राज्य रक्त संक्रमण परिषद के सदस्य, डागा स्मृति शासकीय महिला चिकित्सालय, गांधीबाग, नागपुर की नियामक एवं कार्यकारी समिति के सदस्य, माननीय जिला कलेक्टर, नागपुर के प्रतिनिधि, नागपुर शहर केंद्रीय पुलिस शांति समिति के सदस्य, अखिल भारतीय मराठी नाट्य परिषद, नागपुर शाखा के कार्यकारिणी सदस्य तथा श्री मयूरेश जीवनविकास परिवार संस्था के अध्यक्ष प्रो. डॉ. राजेश नाईक ने शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, नागपुर की रक्तपेढ़ी में जाकर अपने जीवन का 95वाँ स्वैच्छिक रक्तदान किया। इस प्रेरणादायी कार्य के माध्यम से उन्होंने समाजसेवा के प्रति अपनी अटूट निष्ठा और मानवता के प्रति समर्पण को एक बार फिर प्रमाणित किया।
इस अवसर पर शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, नागपुर की रक्तपेढ़ी के प्रमुख डॉ. मुकेश वाघमारे, रक्त संक्रमण अधिकारी डॉ. अनिकेत झोडपे, डॉ. हिमांशू पिंपरीकर, डॉ. प्रांजल तरोने, डॉ. गिरीराज शर्मा, डॉ. माधुरी लाहोळे, प्रयोगशाला तकनीशियन गीताताई साहू, रक्तपेढ़ी की समाजसेविका शुभांगी वाघमारे, विक्रम लांजेवार तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
इस अवसर पर मयूरेश जीवनविकास परिवार संस्था की ओर से एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। उपस्थित अतिथियों के करकमलों से प्रो. डॉ. राजेश नाईक को रक्तदाता कार्ड, रक्तदान प्रमाणपत्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर उनके निरंतर, निस्वार्थ एवं प्रेरणादायी सामाजिक योगदान का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों ने प्रो. डॉ. राजेश नाईक की निरंतर रक्तदान सेवा की मुक्त कंठ से सराहना की तथा युवाओं से उनके आदर्श का अनुसरण करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि नियमित रक्तदान से असंख्य मरीजों को नया जीवन मिलता है और समाज में मानवता, सेवा तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना और अधिक सुदृढ़ होती है। लगातार 95 बार स्वैच्छिक रक्तदान कर प्रो. डॉ. राजेश नाईक ने समाजसेवा, मानवता एवं रक्तदान जनजागरण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी मिसाल स्थापित की है। उनका यह समर्पित कार्य निश्चित रूप से समाज के लिए अनुकरणीय एवं प्रेरणास्रोत है।