June 29, 2026

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छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल का मनरेगा में राज्यांश बढ़ाने का अनुमोदन राज्य के खजाने पर भार : दीपक बैज

मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तराखंड जैसे भाजपा शासित राज्यों ने अपने प्रदेश के हित में मनरेगा के भार का किया विरोध




रायपुर | मीनल केडेकर | भाजपा शासित राज्य मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तराखंड ने मनरेगा में राज्य पर पड़ने वाले बोझ का विरोध किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल ने मनरेगा के जी राम जी स्वरूप का अनुमोदन करते हुए केंद्र और राज्य का खर्च 60 एवं 40 प्रतिशत की मंजूरी दे दिया है। यह राज्य की जनता पर बोझ है। छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल को भी मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के समान इस कानून पर राज्य के हित में आपत्ति जताना था। यही नहीं भाजपा शासित राज्यों ने किसानी काम के समय मनरेगा के काम बंद करने पर भी आपत्ति जताया है जबकि छत्तीसगढ़ सरकार में बैठे नेताओं ने अपनी कुर्सी बचाने राज्य के हित में विरोध करने की हिम्मत नहीं दिखाई।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि ने कहा कि बड़ा प्रश्न यह है कि राज्य के वित्तीय संसाधन सीमित है। राज्य का सारा टैक्स तो जीएसटी के माध्यम से केंद्र लेता है फिर मनरेगा का बोझ राज्य पर डालने से राज्य के अन्य कार्य प्रभावित होंगे। भाजपा सरकार पिछले ढाई साल से वित्तीय रोना रोकर वैसे ही कोई नई योजना नहीं शुरू कर पाई है, अब मनरेगा का भार उठाने के बाद राज्य के और काम भी प्रभावित होंगे। यह फैसला राज्य की जनता के साथ धोखा है। राज्य को मनरेगा के मामले में केंद्र के सामने विरोध प्रकट करना था कि पूरा खर्च केंद्र उठाये या उसके लिए विशेष सहायता करे।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल के द्वारा मनरेगा के वित्तीय प्रावधान में 60-40 की मंजूरी दिये जाने का निर्णय राज्य के जनता पर अन्याय है। अभी तक मनरेगा केंद्र प्रवर्तित योजना थी, अब इसमें 40 प्रतिशत भाग राज्य को देना होगा। केंद्र सरकार की चाटुकारिता में साय सरकार ने राज्य के हितों का ख्याल नहीं रखा। राज्य के हिस्से को 40 प्रतिशत करने के केंद्र के फैसले का विरोध करने के बजाय इस राज्य मंत्रिमंडल के द्वारा अनुमोदित कर दिया गया। 

साथ ही इसके लिए 4000 करोड़ रू. का वित्तीय प्रावधान भी किया गया है, जबकि अभी तक राज्य के मनरेगा पर 6200 करोड़ रू. खर्च होते थे, इसका मतलब है भले घोषित तौर पर दिन बढ़ा दिया लेकिन सरकार की नीयत मनरेगा के काम में कटौती की है जब बजट कम है तो ज्यादा दिन कैसे काम देंगे? जीरामजी कानून पास हुए 8 महीने हो गये। अमूमन 15 जून के बाद मनरेगा के काम बंद हो जाते है। सरकार अब निर्णय ले रही मतलब इस फैसले से 4 माह तक काम नहीं होगा, उसके बाद काम शुरू होगा।




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सोनम कौर भाटिया

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