संघ के एजेंडे और मोदी के फंडे में काफी विरोधाभास है। अब दो भाजपा और दो संघ हैं। एक संघी भाजपा और दूसरा असंघी भाजपा। एक मोहन भागवत का दूसरा मोदी का। बीजेपी जिस राहुल को नाकाबिल बताती थी। उसके साथ भारत जोड़ो यात्रा में आम आदमी के सवाल चल रहे हैं। राहुल अपने पीछे छाप छोड़ते जा रहे है। और यह छाप संघ की चिंता की वजह बन गए हैं।
नई दिल्ली । रमेश कुमार ‘रिपु’ । आरएसएस के सुर बदल गये। संघ की सियासत का रसायन बदल गया। संघ ने अपना रंग बदल लिया। संघ अपनी नीति बदल रही। संघ ने अपनी विचारधारा को नया चोला पहना दिया। आखिर संघ को ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ गई? देश की राजनीति में ऐसा क्या हो गया कि संघ के कान खड़े हो गये? मोदी की सत्ता संघ को अपनी ताकत का एहसास कराते रहता है कि वो कितनी ताकतवर है। विहिप का अध्यक्ष बदल देता है। स्वदेश जागरण मंच का लीडर, भारतीय मजदूर संघ का लीडर, और आदिवासी समुदाय संगठन को क्या करना है,वही तय करता है।
मोदी सत्ता कहती आई है,हम सरकार में हैं। हम नहीं , तो सत्ता नहीं। सत्ता नहीं,तो संघ नहीं। वहीं संघ को यह गुमान है, कि हम हैं तो तुम हो। हम नहीं,तो तुम नहीं। आरएसएस के घर से निकले संघ प्रचारक के हाथों में सत्ता की बागडोर है। बावजूद इसके देश के बदलते मिजाज को देखकर संघ को मोदी सत्ता की बातों पर संदेह होने लगा है। क्यों कि भारत जोड़ो यात्रा के साथ जो सवाल चल रहे हैं। वे गूंज में तब्दील हो रहे है। इससे संघ की बेचैनी बढ़ गई है।अल्पसंख्यक के प्रति बीजेपी की सोच और मोदी सत्ता का पीएफआई पर कार्रवाई,देश में धर्म और जाति की राजनीति के जरिये नफरत का जहर फैलाया जा रहा है। इस बात को प्रमुखता से राहुल गांधी अपने भारत जोड़ो यात्रा अभियान में उठा रहे हैं। यू.पी. में मदरसे के खिलाफ कार्रवाई से मुस्लिम वोटर नाराज है। संघ को लगता है अल्पसंख्यक को एकदम से नाराज करके बीजेपी ढाई घर नहीं चल सकेगी। इसीलिए उसने अपनी सोच बदली। संघ प्रमुख मस्जिद गए। और इमाम उमर इलायसी से भी मिले। कई ओहदेदार मुस्लिमों से मिले। विजय दशमी के अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, अल्पसंख्यक डरे नहीं। उन्हें हमसे या हिन्दुओं से कोई खतरा नहीं है। संघ और हिन्दुओं के स्वभाव में नहीं है डराना। संघ को कांग्रेस महिला विरोधी बताता आया है।
नागपुर में संघ ने शस्त्र पूजा में पहली बार महिला मुख्य अतिथि संतोष यादव को बनाया। संतोष दो बार माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की एक मात्र महिला हैं। मातृशक्ति को ऊँचा स्थान देकर संघ महिला वोटरों को रिझाने की पहल की।वहीं दूसरी ओर संघ प्रमुख ने अल्पसंख्यकों की बढ़ती संख्या पर चिंता जाहिर की, कहा, जनसंख्या नीति जरूरी है। राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए जनसंख्या असंतुलन पर नजर रखना होगा। किसी को भी रियायत न दी जाए। कुछ साल पहले फर्टिलिटी रेट 2.1 था। इसे 2 तक लेकर आएं। असदुद्दीन ओवैसी संघ प्रमुख को निशाने पर लिया। हिन्दुओं और मुसलमानों का एक ही डीएनए है तो असंतुलन कहांँ है। जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत नहीं है। मुसलमानों की प्रजनन दर में सबसे तेज गिरावट आई है। चिंता बढ़ती उम्र और बेरोजगार युवाओं की है। स्वदेशी जागरण मंच से दत्तात्रय होसवाले ने मोदी सरकार के विकास के तमाम दावों को झूठा बताते हुए देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई,गरीबी,आर्थिक और सामाजिक विषमता पर कटाक्ष कर मोदी सत्ता को आइना दिखाया। पार्टी को बचाने गांधी परिवार सड़कों पर है। देखकर संघ अचंभित है। राहुल नए अवतार में है। कांग्रेस के लिए 2024 की उम्मीद हैं।
देश में एक नई राजनीति आकार ले रही है। विपक्ष को एक मंच पर लाने वाले हैरान है। वे खुद भी नहीं जानते सारे क्षत्रप जुड़ेगे भी कि नहीं। वहीं कर्नाटक में भारत जोड़ो यात्रा पहुंँची तो हड़कंप मच गया। बीजेपी के पंडाल में। आरएसएस के तहखाने में। उसकी वजह साफ है। संघ मानता है,कि देश का मिजाज बदलने लगा है। सौ फीसदी भाजपा कांग्रेसी हो गई है। फर्क की गुंजाइश नहीं। अब संस्कार भी बदल गए। समूची भाजपा के। भाजपाइयों के। बीजेपी नेताओं के भी। वह जमात भी बदलने लगी है। जिसने कांग्रेस के विकल्प के रूप में बीजेपी को चुना था। वह जमात अब निराश हो चली है। ऐसा दावा दक्षिण भारत में राहुल की भारत जोड़ो यात्रा से जुडने वाले कर रहे हैं।
एबीपी निल्सन के सर्वे के अनुसार तमिलनाडु और केरल में इस यात्रा से राहुल गांधी की लोकप्रियता और उनके प्रति विश्वास बढ़ा है। इससे संघ का बी.पी.बढ़ना स्वाभाविक है। राहुल ने कर्नाटक की बसवराज एस. बोम्बई की सरकार को भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार कहा। यह सरकार किसानों,मजदूरों,छोटे और मध्यम व्यापारियों से 40 फीसदी कमीशन लेती है। कर्नाटक के ठेकेदारों ने प्रधानमंत्री को चालीस फीसदी कमीशन की शिकायत भेजी। कोई कार्रवाई नहीं हुई । कर्नाटक के मैसूर में राहुल गांधी ने बारिश में भीगते हुए लोगों को सचेत किया। बीजेपी और संघ की फैलाई नफरत को रोकना है। कोरोना काॅल में आॅक्सीजन सिलेंडर बगैर कई जानें चली गई। सरकार को मुआवजा देना चाहिए। चूंकि अगले साल कर्नाटक विधान सभा का चुनाव है। भारत जोड़ो यात्रा कर्नाटक में 21 दिनों तक चली। कांग्रेस यहांँ वापसी का प्लान बना रखी है। हर विधान सभा में कांग्रेस यात्रा करेगी।
दक्षिण भारत के पांँच राज्यों में लोकसभा की 129 सीटें हैं। कर्नाटक में 28,तमिलनाडु 39 आन्ध्र में 25,और केरल में 20, और तेलंगाना में 17सीट। केरल,तमिलनाडु और आन्ध्र प्रदेश में बीजेपीे शून्य है। कर्नाटक में उसकी सरकार है,मगर कई बीजेपी नेताओं के भ्रष्टाचार की फाइल सीबीआई और ई़.डी.के पास है। दक्षिण ने गांधी परिवार का हमेशा साथ दिया। संघ को लगता है दक्षिण से कांग्रेस को संजीवनी मिली तो कांग्रेस के अच्छे दिन लौट आयेंगे। संघ इसलिए बेचैन है, कि भारत जोड़ो यात्रा के साथ वो जमात भी चल रही है, जिसने कांग्रेस के विकल्प के रूप में बीजेपी को चुना था। यात्रा में आम आदमी से जुड़े सवालों के चलने से संघ खौफजदा है। देश के दो उद्योगपति बेरोजगारी दूर नहीं कर सकते। बेरोजगारी व्यापारी ही दूर कर सकता है।
मगर जीएसटी और महंगाई में व्यापारी टूट गया है। संघ को चिता सताने लगी है कहीं ऐसा न हो कि नीतीश कुमार की बात सच हो जाए, कि जो 2014 में आए हैं,वे 2024 में नहीं रहेंगे।दरअसल संघ के एजेंडे और मोदी के फंडे में काफी विरोधाभास है। अब दो भाजपा और दो संघ हैं। एक संघी भाजपा और दूसरा असंघी भाजपा। एक मोहन भागवत का दूसरा मोदी का। बीजेपी जिस राहुल को नाकाबिल बताती थी। उसके साथ भारत जोड़ो यात्रा में आम आदमी के सवाल चल रहे हैं। राहुल अपने पीछे छाप छोड़ते जा रहे है। और यह छाप संघ की चिंता की वजह बन गए हैं।