सेक्टर-9 अस्पताल में निजी मेडिकल कॉलेज के नाम पर निजीकरण की आशंका, कर्मचारियों के हितों की रक्षा की मांग
भिलाई/दुर्ग। मिनल केड़ेकर । आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की विनिवेश एवं निजीकरण नीतियों पर सवाल उठाते हुए भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के भविष्य को लेकर चिंता जताई है। पार्टी ने IDBI बैंक के विनिवेश और भिलाई इस्पात संयंत्र के निजीकरण की आशंकाओं पर केंद्र सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि भिलाई स्टील प्लांट देश की औद्योगिक विरासत, छत्तीसगढ़ के गौरव और हजारों श्रमिक परिवारों की आजीविका से जुड़ा महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रम है, इसलिए इसके भविष्य से संबंधित किसी भी निर्णय में जनहित और कर्मचारी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भिलाई स्टील प्लांट केवल लोहे का उत्पादन करने वाला कारखाना नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत के औद्योगिक विकास और छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने हाल ही में उद्योगपति गौतम अडानी के भिलाई आगमन और स्टील प्लांट के दौरे के बाद निजीकरण को लेकर उठ रही आशंकाओं का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार से अपनी नीति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल किसी उद्योगपति के दौरे के आधार पर निजीकरण का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, लेकिन राष्ट्रीय महत्व के इस संस्थान के भविष्य को लेकर कर्मचारियों और आम जनता की चिंताओं को दूर करना सरकार की जिम्मेदारी है।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री संजीत विश्वकर्मा ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार को इन संस्थानों को निजी हाथों में सौंपने के बजाय उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने, आधुनिकीकरण करने और रोजगार सुरक्षित रखने पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, प्रदेश सचिव एवं प्रदेश प्रवक्ता देविंदर सिंह भाटिया ने सेक्टर-9 चिकित्सालय को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र के निजीकरण की शुरुआत संभवतः सेक्टर-9 स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र में निजी मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने के नाम पर की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए निजीकरण करना आवश्यक नहीं है। भिलाई इस्पात संयंत्र के सार्वजनिक स्वरूप को बरकरार रखते हुए भी मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा सकती है। इसके लिए केंद्र सरकार और संयंत्र प्रबंधन को ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, जिससे चिकित्सा शिक्षा का विस्तार भी हो और कर्मचारियों को मिलने वाली मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाएं भी सुरक्षित रहें। भाटिया ने केंद्र सरकार के नारे “देश नहीं बिकने दूंगा” का उल्लेख करते हुए सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने दुर्ग जिले के एसीसी सीमेंट उद्योग का उदाहरण देते हुए कहा कि अडानी समूह के स्वामित्व में इसके जाने के बाद औद्योगिक संस्थानों के स्वामित्व और भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि सार्वजनिक संस्थानों को बेहतर तरीके से संचालित और आधुनिक बनाया जा सकता है, तो उन्हें निजी हाथों में सौंपने की जरूरत क्यों पड़ रही है? उनके अनुसार, सरकार को सार्वजनिक संस्थानों को मजबूत करने और उनकी सेवाओं का विस्तार करने की दिशा में काम करना चाहिए।भिलाई इस्पात संयंत्र के वर्तमान एवं पूर्व कर्मचारी तथा क्षेत्र के व्यापारी लंबे समय से संयंत्र और उससे जुड़ी सुविधाओं के संरक्षण की मांग करते आ रहे हैं। उन्होंने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के आवासों के लीज किराये में कथित रूप से दस गुना तक वृद्धि किए जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस तरह की वृद्धि से सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ सकता है और उनके सामने अपने आवास बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो सकती है। उन्होंने चिंता जताई कि एक ओर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के आवास संबंधी हित प्रभावित होने की आशंका है, वहीं दूसरी ओर सेक्टर-9 चिकित्सालय की चिकित्सा सुविधाओं के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है,सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों के लिए सेक्टर-9 चिकित्सालय केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा के बाद मिलने वाली महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा है। इस व्यवस्था में किसी भी बदलाव का सीधा असर कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके परिवारों पर पड़ सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार और संयंत्र प्रबंधन से अस्पताल की मौजूदा चिकित्सा सुविधाओं, कर्मचारियों के स्वास्थ्य संबंधी हितों तथा संयंत्र के सार्वजनिक स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए स्पष्ट नीति घोषित करने की मांग की। उन्होंने जोर देकर कहा कि आम आदमी पार्टी मेडिकल कॉलेज खोलने के विरोध में नहीं है, बल्कि उसके नाम पर सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के निजीकरण और कर्मचारियों को उनके अधिकारों से वंचित किए जाने की आशंका का विरोध करती है।
दुर्ग लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती गीतेश्वरी बघेल ने भिलाई स्टील प्लांट को छत्तीसगढ़ की पहचान बताते हुए इसके भविष्य से जुड़े किसी भी निर्णय में स्थानीय जनता, श्रमिकों और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने की आवश्यकता जताई।
आम आदमी पार्टी के लोकसभा महासचिव ज्ञान प्रकाश तिवारी ने सरकारी संपत्तियों से संबंधित नीतिगत निर्णयों में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत बताई। उन्होंने जानकारी दी कि पार्टी इस विषय को जनता के बीच उठाएगी और केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब मांगती रहेगी।
जिला अध्यक्ष रवि साहू ने भिलाई स्टील प्लांट को प्रदेश के स्वाभिमान से जुड़ा संस्थान बताते हुए इसके निजीकरण की किसी भी आधिकारिक योजना के संभावित प्रभावों की समीक्षा करने और जनहित में विरोध दर्ज कराने की बात कही। जिला महासचिव अजय रामटेके ने रोजगार, श्रमिक सुरक्षा और देश के दीर्घकालिक आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े निर्णय लेने पर जोर दिया।
ब्लॉक अध्यक्ष पुरुषोत्तम सिंह राजपूत ने कर्मचारियों, श्रमिकों और स्थानीय नागरिकों की चिंताओं को गंभीरता से लेने की मांग की। अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष दिवाकर सिंह ठाकुर ने औद्योगिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने और सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े रोजगार पर किसी भी नीतिगत बदलाव के प्रभाव का आकलन करने की आवश्यकता बताई। किसान प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष रूपेंद्र चंद्राकर ने कहा कि आर्थिक नीतियां बनाते समय किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। वरिष्ठ सदस्य देवनारायण भर्तवाज ने भिलाई स्टील प्लांट के भविष्य को लेकर उठ रही आशंकाओं पर आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की, ताकि किसी भी प्रकार की अनिश्चितता का समाधान तथ्यों के आधार पर हो सके।
आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि भिलाई स्टील प्लांट के निजीकरण या किसी निजी कंपनी को सौंपने संबंधी किसी भी योजना पर स्थिति स्पष्ट की जाए। संयंत्र के भविष्य, संभावित विनिवेश और स्वामित्व में बदलाव से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक की जाए तथा कर्मचारियों, श्रमिकों और उनके परिवारों के रोजगार एवं सेवा संबंधी हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। पार्टी ने सेक्टर-9 चिकित्सालय की वर्तमान स्वास्थ्य सुविधाओं को सुरक्षित रखने, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके आश्रितों के चिकित्सा अधिकारों की रक्षा करने तथा मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए सार्वजनिक स्वरूप को बनाए रखते हुए विकल्प तलाशने की भी मांग की है।
पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि भिलाई स्टील प्लांट को निजी हाथों में सौंपने का कोई निर्णय लिया जाता है, तो आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ जनता और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएगी और आवश्यकता पड़ने पर जनआंदोलन करेगी। पार्टी ने दोहराया कि भिलाई स्टील प्लांट के भविष्य से जुड़े किसी भी निर्णय में देशहित, प्रदेशहित, श्रमिकों के अधिकार और आम जनता के हित सर्वोपरि होने चाहिए।