August 25, 2022

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नेता बने डाॅन , किसे चुने अवाम : संसद में हर दूसरी कुर्सी पर बैठे हैं क्रीमनल सांसद




"संसद में हर दूसरी कुर्सी पर क्रीमनल सांसद बैठे हैं। इन्हें कोर्ट से सजा हो जाए तो कइयों की ताउम्र जेल में बीत जाए। अपराधियों के हाथ में देश और प्रदेश की कमान है।

हर पार्टी में रेपिस्ट,गुंडे,डकैत, भूमाफिया, अपहरणकर्ता , और हत्या के आरोपी हैं। सवाल यह है,कि दागी नेता चुनाव नहीं लड़ सकें,क्या ऐसा कानून बन पायेगा?

रायपुर। रमेश कुमार ‘रिपु’ । बिहार में कानून मंत्री के पद की शपथ कार्तिक कुमार के लेते ही,देश में सनाका खिंच गया। क्यों कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट था। और बिहार पुलिस के लिए वो लापता थे। उनके कानून मंत्री बनने पर पूर्व केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर ने कहा,‘बिहार में जंगल राज लौट आया है।’राजनीति में उंगली उठाना बड़ा सहज है।

रविशंकर यह भूल गए, कि मोदी के मंत्रीमंडल में 78 मंत्री हैं। जिसमें 33 के खिलाफ क्रीमनल केस दर्ज है और 24 के खिलाफ गंभीर मामले दर्ज हैं। एक मंत्री के खिलाफ हत्या का और चार पर हत्या का प्रयास और अपहरण का आरोप है। ऐसे में वजीरे आजम का यह रोना हैरान करता है,कि संसद में ईमानदार और स्वच्छ छवि वाले हों तो लोकतंत्र की साख बनती है। सवाल यह हैै कि ऐसे लोग मिलेंगे कहाँ? हर पार्टी में एक से बढ़कर एक डाॅन हैं। सिर्फ बिहार ही नहीं, हर राज्य में ऐसे कई नेता हैं,जो अपने इलाके के डाॅन हैं। मगर जमानत पर हैं। और संसद में या फिर विधान सभा में बैठकर देश और प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर सवाल करते हैं। कानून बना रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की पांँच जजों की संविधान पीठ का कहना था, आरोप तय होने मात्र से किसी को चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। संसद में कानून लायें,ताकि अपराधी राजनीति से दूर रहें। ऐसा दिन कब आयेगा,संसद भी नहीं जानती। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने वेबसाइट,इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में ऐसे प्रत्याशियों को अपने अपराधिक मामले को सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं। सवाल यह है कि लोकतंत्र के मंदिर में जनता किसे बिठाये? इसलिए कि हर दल में चुनाव के वक्त इस बात की होड़ रहती है, बताने के लिए कि उसके खेमें में कितने बाहुबली, रेपिस्ट, हत्यारे, नक्सली,भू माफिया और गुंडें़ है। क्यों कि पार्टी के यही आधार स्तंभ है। पार्टी इनके ही दम पर चलती है।

चुनाव की दिशा इनकी ताकत,दहशत,पैसा और गुंडई के दम पर बदलती है। इसका प्रमाण है लोकसभा के 542 सासदों में 233 के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज हैं । वहीं 159 ऐसे हैं,जिन्हें सजा हो जाए तो सारी उम्र जेल में ही बीत जायेगी, मगर सजा पूरी नहीं होगी। वहीं राज्य सभा में 228 सांसदो में 51 सांसदों के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज है। और 20 के खिलाफ संगीन अपराध दर्ज है। यानी रेपिस्ट हैं,अपहरण का आरोप है,हत्या के आरोपी हैं ।

ऐसे में सवाल यह हैं, कि जंगल राज की कमान किसके हाथ में नही हैं। वोटर बलात्कारी को चुनें या फिर हत्यारे को अथवा अपहरणकत्र्ता को। उसे वोट इन्हीं में से किसी एक को देना है। उसकी मजबूरी है। उनका विरोध भी नहीं कर सकता। कोई बड़ा डाॅन है,कोई छोटा डाॅन है। यह कह सकते हैं, कि देश के हर राज्य के विधायक और सांसद की कुर्सी पर नजर डालें तो हर दूसरी कुर्सी पर बैठे माननीय के खिलाफ जुर्म दर्ज है। वजीरे आजम ने संदन में कहा था,कि दागी नेता स्वस्थ्य राजनीति की धोतक नहीं है।यानी साफ सुथरी राजनीति की बात केवल जुबानी है। सच्चाई यह है, कि राजनीतिक पार्टियांँ जमकर दागी नेताओं को टिकट बांटते हैं। 353 सांसद एनडीए के हैं।

भाजपा के 116 सांसदों पर क्रिमिनल केस दर्ज है। और एनडीए को शामिल कर लें तो 159 सांसदों के खिलाफ संगीन अपराध दर्ज हैं। और अकेले बीजेपी के 59 सांसदों के खिलाफ संगीन मामले कोर्ट में चल रहे हैं। बीजेपी के पांँच सांसदो पर हत्या का आरोप है,जबकि बसपा और कांग्रेस के दो सांसदों पर। कांग्रेस के 29 सांसदों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं।

ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के 22 सांसदों में से 9 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। बसपा के 10 में से 5 सांसदों पर भी आपराधिक मामले चल रहे हैं। सपा के भी पांँच सांसदों में से दो पर केस दर्ज हैं।

बिहार में जदयू के 16 सांसदों में 13 सांसदों पर जुर्म दर्ज है।

छत्तीसगढ़ के 90 विधायकों में से 24 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 13 के खिलाफ गंभीर अपराधिक मामले हैं। कांग्रेस के 72 विधायकों में 19 के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज है। वहीं भाजपा के तीन और छजका के दो विधायकों में एक पर गंभीर अपराधिक मामला दर्ज हैं। बेमेतरा सीट से कांग्रेस के विधायक आशीष छाबरा के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है। वहीं पाटन सीट से विधायक भूपेश बघेल के खिलाफ सरकारी कर्मचारी को अपने कार्य से रोकने और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज है। इसके अलावा जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार क्षेत्र के विधायक प्रमोद कुमार शर्मा के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज है।

दरअसल देश में हर साल अपराधिक सांसदों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में सुप्रीेम कोर्ट का चिंतित होना स्वाभाविक है। अपराधिक नेताओं के माननीय बनने की बढ़ती संख्या से जाहिर है,कि जनता की मजबूरी है,इन्हें वोट करना। साल 2009 में 162 सांसदों के खिलाफ मामले दर्ज थे,जिसमें 76 के खिलाफ गंभीर मामले दर्ज थे। यानी सजा हो जाए तो सारी जिन्दगी जेल में बितानी पड़े।

सन् 2014 में यह संख्या बढ़ गई। 185 सांसदों के खिलाफ क्रीमनल मामले और 112 पर गंभीर मामले थे। और 2019 के चुनाव में संसद पहुंँचे 233 सांसंदों के खिलाफ विभिन्न प्रकार के मामले दर्ज हैं। राज्यों की स्थिति भी बहुंत अच्छी नहीं है।

यूपी में 403 विधायकों में 205 के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज हैं। और 165 ऐसे विधायक हैं,जिन्हें सजा हो जाने पर सपने में भी कभी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यानी अपराधियों की बहुमत वाली सरकार है।

तमिलनाडु में 325 विधायकों में 178 के खिलाफ क्रीमनल मामले हैं।

बिहार में 150 विधायकों पर क्रीमनल मामले हैं दर्ज हैं। 89 विधायकों के खिलाफ सीरियस मामले दर्ज हैं।

महराष्ट्र में 27 मंत्रियों के खिलाफ गंभीर मामले दर्ज हैं।

पश्चिम बंगाल में 142 के खिलाफ क्रीमनल मामले चल रहे हैं। जिसमें 60 के खिलाफ गंभीर मामले हैं। यानी सजा हो जाए तो राजनीति खत्म हो जाये ।

राजस्थान में 67 के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज हैं और 19 के खिलाफ गंभीर मामले दर्ज हैं। यानी हत्या,रेप,हत्या का प्रयास,अपहरण,लूट आदि।

गुजरात में 47 के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज हैं,जबकि 22 के खिलाफ सीरियस मामले दर्ज हैं।

एम.पी. में बीजेपी के 28 विधायकों के खिलाफ सीरियस मामले दर्ज हैं। वहीं कांग्रेस के 15 विधायकों पर। क्रीमनल केस वाले कांग्रेस के 56 विधायक हैं,जबकि बीजेपी के 34 विधायक हैं। सदन में इतने अपराधिक सांसद और विधायकों के होने से वजीरे आजम का भावुक होना जायज है।

महिलाओं के खिलाफ अपराध में राज्यवार सासंदों और विधायकों की बात करें तो महाराष्ट्र के 12 सासंदों- विधायकों के ऊपर महिलाओं से संबंधित अपराध के मामले दर्ज हैं। बिहार, गुजरात, तमिलनाडु में दो,एम.पी. में पाँच,यू.पी. में तीन,उत्तराखंड में तीन,ओड़िसा में 16, और बंगाल में भी इतने ही के खिलाफ मामले दर्ज हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा संकेत दिया है,कि संगीन अपराधों में जिन नेताओं के खिलाफ चार्ज फ्रेम हो जाएं उनको चुनाव लड़ने से रोका जाए। और गंभीर अपराधों में, मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए कराई जाए। लेकिन यह दिन कब आयेगा,संसद भी नहीं जानती।





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सोनम कौर भाटिया

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