July 12, 2022

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बंद करो नफरत का कारखाना : धार्मिक अस्थाओं के साथ खिलवाड़ करने वालों ने हिन्दू और मुसलमानों के बीच बढ़ा दी हैं दरारें




‘‘कन्हैया की हत्या से जाहिर है कि कट्टरपंथी इस्लामिक सोच भारत में कदम रख दिया है। हेट स्पीच और बयान से अपनी टीआरपी बढ़ाने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं होने की वजह से धार्मिक अस्थाओं के साथ खिलवाड़ करने वालों ने हिन्दू और मुसलमानों के बीच दरारें बढ़ा दी है।’’

रायपुर । रमेश कुमार ‘रिपु’ । राजनीति का धर्म होना चाहिए,ना कि धर्म की राजनीति। धर्म की राजनीति को रबड़ की तरह खींच कर अपनी टीआरपी बढ़ाने का खेल जब भी होता है,उन्माद की आंधी पर बवाल मचता है। इन दिनों में देश में यही हो रहा है। दुश्वारियां बढ़ती जा रही है। न्यू इंडिया में लगता है, मजहब ही सीखाता है आपस में बैर करना। अब बैर करने के नायाब तरीके इजाद हो रहे हैं। अजमेर शरीफ की दरगाह में खाविंद हैं सलमान चिश्ती। जबकि ये हिस्ट्री शीटर हैं। इनके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा, जो नूपुर का सिर काटकर लायेगा उसके नाम अपना मकान कर दूंगा। जाहिर सी बात है कि उदयपुर में जिहादी शैली की हत्या का जो खौफनाक चेहरा देखने को मिला है,उसकी तपिश को बढ़ाने के लिए सलमान चिश्ती जैसे लोग समाज के लिए चार सौ चालीस वाॅट के सवाल हैं। जिहादी सोच जहरीली है। समाज और देश के हित में नहीं है।

वहीं पुलिस का काम है समाज में वैमनस्य की आग भड़ाकाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना। लेकिन सलमान चिश्ती को पुलिस ने सलाह दी कि,कह दो शराब के नशे में ऐसा कह दिया। हैरानी होती है,जो व्यक्ति गंभीर मामलों का आरोपी है,उसे जेल में डालने की बजाय पुलिस उसे बचाने मे लगी हे। तो क्या यह मान लिया जायेेेे कि नफरत का रायता फैलाने में पुलिस,नेता और समाज को बाँटने वाले लोग आगे-आगे हैं..!

पाकिस्तान के मौलाना इंजीनिययर मोहम्मद अली नूपुर मामले में कहते हैं,पहला मुजरिम तस्लीम रहमानी है। पूरे मामले में नूपुर को दोषी ठहराया जा रहा है,वहीं मुस्लिम पैनलिस्ट तस्लीम अहमद रहमानी को लेकर कोई कुछ नहीं कह रहा है। जबकि तस्लीम अहमद रहमानी ने नूपुर को भड़काया। सवाल का उन्होंने जवाब दिया। सवाल यह है कि नूपुर दोषी है तो फिर तस्लीम रहमानी भी दोषी क्यों नहीं है? जो नुपूर को उद्वेलित कर रहे थे। ज्ञानवापी मामले में बहस के दौरान नूपुर शर्मा ने वहीं कहा,जो हदीस में लिखा है। इससे पहले भी जाकिर नाइक यही बात कह चुके हैं। ऐसे में मुसलमानों को नागवार नहीं गुजरनी चाहिए।

वैसे किसी भी धर्म का अनादर नहीं करना चाहिए। साथ ही कोर्ट में विचाराधीन मामले पर टी.वी.पर बहस नहीं होनी चाहिए। कोर्ट कभी भी भावनाओं में बहकर फैसला नहीं सुनाता। लेकिन नूपुर के मामले में जज साहेबान की नेताओं जैसी टिप्पणी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। नूपुर के खिलाफ चार्ज लगा नहीं। कोई गवाही हुई नहीं हुई। कोर्ट में कोई साक्ष्य पेश नहीं हुआ और उदयपुर में मामले के लिए नूपुर कैसे दोषी है,जज साहेबान नहीं बताये। विभिन्न राज्यों में दायर मामले को दिल्ली की किसी अदालत में ट्रांसफर करने की याचिका नूपुर ने दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट को उनकी याचिका स्वीकार या खारिज करने पर फैसला देना था। सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर की याचिका पर लिखित में अपनी टिप्पणी का जिक्र नहीं किया है। ऐसा पहली बार हुआ। इसीलिनए देश के एक सैकड़ा से अधिक गणमान्य नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर नूपुर मामले में कही गई बात को वापस लेने की मांग की है।

फ्रांस में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाते वक्त छात्रों को मोहम्मद साहब का कार्टुन टीचर के दिखाने पर एक आतंकी ने उनकी हत्या कर दी। उन्हें श्रद्धांजलि देते वक्त उनके घर के बाहर मोहम्मद साहब के कई कार्टुन सरकार की तरफ से लगवा दिये गये थे। बात 13 नवम्बर 2015 में फ्रांस की है। पैगम्बर मोहम्मद का कार्टुन छापे जाने पर इस्लाम के नाम पर 137 बेगुनाहों को आतंकियों ने मार दिया था।

हमलावर में एक जिंदा था,जिसे सजा हुई, उदयपुर की जिहादी शैली की हत्या के ठीक एक दिन बाद। जिहादी हमले भारत में होते आए हैं। 26/11 का हमला सबसे अधिक भयावह था। कश्मीर में जेहादी आतंकवाद में बरसों से जानें जा रही है। कन्हैया की हत्या उसी तरह हुई है,जिस तरह इस्लामी देशों में होता है। ऐसे मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए। सही कदम उठाना जरूरी है। ताकि नफरत के कारखाने बंद हो सकें।

हिन्दू और मुसलमानों के बीच तनाव की अंगीठी जलाने और सांप्रदायिक अशांति फैलाने वाले हर राज्य में दिखते हैं। कर्नाटक में छात्रा का हिजाब पहनकर स्कूल जाने का मामला हो,या हिन्दू मेले में मुसलमानों का दुकान लगाने का मामला हो। विवाद की दरारें बहुत बडी है। मोहम्मद अखलाक की लीचिंग मामला 2016 में हुआ लेकिन,गोरक्षको की संख्या इतनी ज्यादा बढ़ गई कि प्रधान मंत्री को कहना पड़ा कि गुंडे लोग गोरक्षक बन गये हैं।

बुचड़खाना चलना मुश्किल हो गया। लव जिहाद को रोकने के लिए योगी ने उत्तर प्रदेश में एंटी रोमियो स्क्वाड बनाया। इनका काम हिन्दू लड़कियो के साथ मुसलिम लड़कों को पकड़ना। शादी शुदा लोगों के घर में, दिमाग में लव जिहाद घुस गया। द कश्मीर फाइल्स फिल्म ने पुराने जख्मों को नया कर दिया। कश्मीरी पंडितों के दर्द को मरहम मिलने की बजाय नफ़रत का रायता फैलाया जाने लगा। सिनेमाघरों से बाहर सांप्रदायिक नारे और मुसलमानों से बदला लेने की बातें कश्मीरी पंडितों की तरफ से आने लगी।

हेट स्पीच और बयान से अपनी टीआरपी बढ़ाने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं होने की वजह से हिन्दू और मुसलमानों के बीच दरारें बढ़ी है। बिग बॉस फेम श्वेता तिवारी ने भोपाल में कहा, मेरी ब्रा का साइज भगवान ले रहे हैं। फिल्म मेकर लीना मणिमेकलाई कनाडा में एक डाॅक्युमेंट्री बनाई।

जिसके एक पोस्टर में मांँ काली के रूप में एक महिला टोरेंटो की सड़क पर सिगरेट पी रही हैं। और हाथ में एलजीबीटी का पोस्टर लिए हुए है। एक दूसरा पोस्टर ट्वीट किया,जिसमें शिव पार्वती सिगरेट पी रहे हैं। काली के प्रति लोगों में आस्था है। लेकिन किसी के धर्म की आस्था को सेकुलर सोच के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। परंपरायें और मान्यताओं को मानना या मानना अलग बात है।

वहीं टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा कहती हैं,मेरे लिए काली मांस खाने वाली और शराब स्वीकार करने वाली देवी हैं। जबकि काली शक्ति की देवी के रूप में पूजी जाती हैं। एक समय ममता बनर्जी नूपुर को गिरफ्तार करने की बात कह रही थीं,अब महुआ के बयान ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। क्यों कि बंगाल में बीजेपी मोइत्रा के गिरफ्तारी की मांग कर रही है। शशिथरूर ने महुआ का समर्थन किया। मणिशंकर ने कहा महुआ पूरा देश तुम्हारे साथ है। दरअसल सनातन धर्म के बारे में कांग्रेस की विचार धारा है,हिन्दू का विरोध करना।

राहुल,कमलनाथ गेरूआ वस्त्र पहने मंदिर जाते देखे गये हैं,लेकिन वे सिर्फ चुनाव के वक्त। मिर्चीबाबा महा मंडेलेश्वर ने 8 जुलाई 2022 को कहा, हिन्दू देवी देवताओं पर कुठाराघात करने वालों के सिर काटकर लाने वाले को बीस लाख रुपये आश्रम की तरफ से दिया जायेगा। मोदी की आम सभा में जय श्री राम के नारे से ममता बनर्जी को एतराज था। उद्धव ठाकरे को हनुमान चालीसा के पाठ से परहेज था। वैसे हेट स्पीच कंट्रोवर्शियल स्टेटमेंट देने वालों की फेहरिस्त लंबी है। ऐसे मामलों में आम आदमी की गिरफ्तारी तो हो जाती है,लेकिन रसूखदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती।

बहरहाल कन्हैया की हत्या से जाहिर है कि कट्टरपंथी इस्लामिक सोच भारत में कदम रख दिया है। हेट स्पीच और बयान से अपनी टीआरपी बढ़ाने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं होने की वजह से धार्मिक अस्थाओं के साथ खिलवाड़ करने वालों ने हिन्दू और मुसलमानों के बीच दरारें बढ़ा दी हैं ।





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