रीवा | रमेश कुमार “रिपु” | धर्म की राजनीति होनी चाहिए या फिर राजनीति का धर्म होना चाहिए | इस सवाल का जवाब देने सियासी बचते हैं। हैरानी वाली बात है कि धर्म संसद में वक्ता भी अपना धर्म भूल जाते हैं। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में धर्म की संसद में महाराष्ट्र से आए संत कालीचरण के एक बयान ने कई सवाल खड़े कर दिये हैं। उन्होंने कहा कि इस्लाम का मकसद राजनीति के जरिए राष्ट्र पर कब्जा करना है। सन 1947 में हमने अपनी आंखों से देखा कि कैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश पर कब्जा किया गया। मोहनदास करमचंद गांधी ने उस वक्त देश का सत्यानाश किया। नमस्कार है नाथूराम गोडसे को, जिन्होंने उन्हें मार दिया।
गांधी को भगवा राजनीतिक लोग पसंद नहीं करते। इसका यह मतलब नहीं है कि धर्म संसद के मंच पर किसी व्यक्ति के खिलाफ़ जहर उगला जाए। कालीचरण पिछले साल सोशल मीडिया पर एक वीडियो की वजह से काफी चर्चा में आए थे। जिसमें वह मंदिर के भीतर शिव तांडव स्त्रोत गाते हुए नजर आ रहे थे। संत कालीचरण के बयान पर देश के कई लोग इत्तिफाक रखते होेंगे लेकिन |
जिस देश की संस्कृति हरि को पिता कहती आई हो उस देश की एक पीढ़ी आज भी गांधी को राष्ट्रपिता मानती है,उसके हत्यारे को धर्म संसद से नमस्कार करना हैरत वाली बात है। यह अलग बात है कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है।
कायदे से देश के संतों को भी चाहिए कि जब वो सियासियों को राजनीति का धर्म सीखाते हैं तो उन्हें भी चाहिए कि धर्म की राजनीति क्या है वो स्वयं भी समझें। राजनीति से वैसे ही जाति जा नहीं रही है।
यही वजह है कि मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार ने पंचायत चुनाव रोक दिए। एक जाति विशेष को कमजोर करने की साजिश करते-करते देश में सवर्ण को हाशिये में रख कर देश को हिन्दुस्तान नहीं बनाया जा सकता। देश की राजनीति में सवर्ण को हाशिये पर रखकर भारत को हिन्दुस्तान नहीं बना सकते। सवाल यह है कि ओबीसी की राजनीति करके बीजेपी क्या हिन्दू राष्ट्र बना सकता है |
कालीचरण जैसे कथित संत गांधी को गाली देकर किस हिन्दू को जगाना चाहते हैं | सवाल तो यह भी है कि जब देश की संसद को पता था कि, देश की संस्कृति हरि को पिता कहती है, तो फिर गांधी को राष्ट्रपिता कहे जाने पर संसद में कोई सवाल नहीं उठा तो फिर इतने बरस बाद नाथूराम गोंडसे को धर्म संसद से नमस्काऱ कहने का क्या औचित्य है?छत्तीसगढ़ में वैसे भी धर्मांतरण का चलन बहुत पुराना है।